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    Pulwama Attack/Silsila Zindagi Ka देश के वीर शहीदों को नमन करता है

    Pulmawa Attack

    Silsila Zindagi Ka, Pulmawa Attack

    Pulmawa Attack- Silsila Zindagi Ka Salute to our Martyr Soldiers.

    Silsila Zindagi Ka, Pulmawa Attack में शहीद हुए वीर ज़वानों को नमन करता है। Pulmawa Attack अब तक की सबसे बड़ी घटना है। पूरा देश सदमे में है। Pulmawa Attack में शहीद हुए ज़वानों को हम दिल से नमन करते हैं।
    तब आँसू की एक बूंद से सातों सागर हारे होंगे
    जब मेहंदी वाले हाथों ने मंगलसूत्र उतारे होंगे।
    Pulmawa Attack के बाद सबकी निगाहें नम हैं। मेरे अल्फ़ाज़ रो रहे हैं। क्योंकि जो हमें सुकून की नींद सुलाने के लिए अपनी आँखों की नींद हराम कर रहे थे, वो ही सो गए हमें सुलाते-सुलाते।

    ये ज़मीं रो रही है, ये आसमां रो रहा है
    रोती निगाहें पूछ रही हैं, ये क्या हो रहा है।
    लहू से लथपथ तिरंगे में लिपटा बदन
    देखो, भारत माँ का वीर सपूत आ रहा है।।

    Pulmawa Attack में आतकंवादियों ने जिस बड़े हादसों को अंजाम दिया है, उससे हिंदुस्तान की आत्मा पर गहरा आघात पहुंचा है। पूरा देश रो रहा है। कौन है जिसकी आँखें नम नहीं हैं। कोई अपने भाई के आने का रास्ता देख रहा था। कोई दुल्हन हाथों में मेहंदी लगाए अपने वीर पति के आने का इंतजार कर रही थी तो कोई कांपते हाथों में लाठी लिए धुँधली आँखों से अपने बेटे का राह देख रही थी।
    लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका भाई, उनका पति, उनका बेटा आएगा तो ज़रूर....मगर तिरंगे में लिपटा हुआ।
    हमें नाज़ हैं तुम पर वीर ज़वानों। तुम्हारी शहादत को देश कभी भूल नहीं पायेगा। "लौटकर आ सके ना जहां में तो क्या, दिलों में याद बनकर रहोगे सदा"।

    जो जग रहे थे हमें सुकूं से सुलाने के लिए
    वो सदा के लिए सो गए हमें सुलाते-सुलाते
    याद रहेंगी सदा शहादत इन वीर ज़वानों की
    नमन बोल रहे हैं लब कंपकंपाते-कंपकंपाते

    जिन्होंने इस घटना को अंज़ाम दिया है, उन्होंने इंसानियत को बदनाम किया है। शहीदों की सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब इंसानियत को शर्मसार करने वालों को सज़ा नहीं मिल जाती। क्योंकि Pulmawa Attack की साजिश बहुत बड़ी साज़िश है और देश ने अपने 37 वीर ज़वानों को खो दिया है।
    दोस्तों! Silsila Zindagi Ka फिर से एक बार Pulmawa Attack में शहीद हुए वीर ज़वानों को नमन करता है और चलते-चलते- शहीदों की चिंताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का बाक़ी यही निशां होगा"।





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