माँ: वो दुआ जो कभी ख़ामोश नहीं होती
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माँ: वो दुआ जो कभी ख़ामोश नहीं होती

पढ़िए माँ पर एक बेहद भावुक हिंदी कविता, जो माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और ममता को शब्दों में बयां करती है। यह कविता हर पाठक की आँखें नम कर देगी।

माँ: वो दुआ जो कभी ख़ामोश नहीं होती


एक भावनात्मक कविता — माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और अनंत ममता को समर्पित

कभी सोचा है...

जिसने हमें चलना सिखाया,

वो आज हमारी एक आवाज़ सुनने को तरस जाती है।

जिसकी उँगली पकड़कर हमने दुनिया देखी,

उसी का हाथ बुढ़ापे में अक्सर अकेला रह जाता है।

माँ...

तुम सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं,

ईश्वर की सबसे सुंदर रचना हो।

तुम वो दुआ हो,

जो हर मुसीबत से पहले

हमारे लिए आसमान तक पहुँच जाती है।

जब मैं छोटा था,

मेरी हर ज़िद तुम्हारी मुस्कान बन जाती थी।

तुम भूखी रहकर भी कहती थीं—

"मुझे भूख नहीं है बेटा,

तू खा ले..."

आज समझ आया,

वो भूख नहीं,

तुम्हारा प्यार था।

मेरे बुखार में

तुम्हारी रातें जागती थीं।

मेरे आँसुओं से पहले

तुम्हारी आँखें भीग जाती थीं।

दुनिया ने मुझे चलना सिखाया,

पर गिरकर फिर उठना

सिर्फ़ तुमने सिखाया।

जब पूरी दुनिया ने कहा—

"तुम नहीं कर पाओगे..."

तब एक तुम थीं

जो चुपचाप मेरे सिर पर हाथ रखकर बोलीं—

"मुझे अपने बच्चे पर भरोसा है।"

माँ...

आज मेरे पास

घर है, गाड़ी है, पहचान है,

लेकिन तुम्हारी गोद जैसी

सुकून की कोई जगह नहीं।

समय बदल गया,

ज़िम्मेदारियाँ बढ़ गईं,

फ़ोन में हज़ारों नंबर आ गए,

पर सबसे कीमती कॉल

अब भी तुम्हारी ही होती है।

एक दिन ऐसा भी आएगा

जब तुम्हारी आवाज़

सिर्फ़ यादों में रह जाएगी।

तब अलमारी में रखी तुम्हारी साड़ी की खुशबू,

रसोई में बचा तुम्हारा स्वाद,

और तकिए पर छूटी तुम्हारी गर्माहट

दिल को हर रोज़ रुलाएगी।

इसलिए...

अगर माँ आज आपके साथ हैं,

तो उन्हें गले लगा लीजिए।

उनके माथे को चूम लीजिए।

उनसे कह दीजिए—

"माँ...

मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ।

आप ही मेरी दुनिया हैं।"

क्योंकि...

माँ के जाने के बाद

घर तो वही रहता है,

लेकिन "घर" नहीं रहता।

और अंत में...

अगर भगवान से

एक ही दुआ माँगने का अवसर मिले,

तो मैं दौलत नहीं,

शोहरत नहीं,

लंबी उम्र भी नहीं माँगूँगा...

मैं बस इतना कहूँगा—

"हे प्रभु,

हर जन्म में

मुझे मेरी माँ ही देना।"

माँ के चरणों में ही

स्वर्ग का सबसे सुंदर रास्ता छिपा होता है।

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