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    बुद्धम शरणम गच्छामि

    BUDDHAM SHARANAM GACHCHHAMI


    जब भी मैं भगवान बुद्ध की कोई तस्वीर देखता हूँ, ऐसा लगता है जैसे बुद्ध मुझे बुला रहे हैं। मुझे बुद्ध बेहद पसंद हैं। उनकी बातें, उनके उपदेश सब कुछ मुझे अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। मुझे कभी कभी लगता है कि आज अगर बुद्ध रहते तो निश्चित तौर पर दुनिया के लोगों का विचार कुछ और होता। वैसे बुद्ध तो आज भी हैं लेकिन लोग उन्हें याद नहीं करते या फिर देख के भी अनदेखा कर देते हैं

    मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि हर इंसान को भगवान बुद्ध की तरह होना चाहिए। मेरा कहने का मतलब यह नहीं कि आप बुद्धत्व को प्राप्त हो जाइए, बल्कि यह कि बुद्ध की तरह जो चाहिए आप कर जाईये।

    फिर आपको दुनिया एक अलग नज़र से देखना शुरू किए देगी। आप गौतम बन कर घर से निकलिए और बुद्ध बन कर घर लौटिए। फिर आप चलिए अपने उस रास्ते पर जिसके लिए आप इस दुनिया में आये हैं। 

    मुझे लगता है कि बुद्ध बन कर चलना आसान नहीं। क्योंकि इस सफर में आपको हज़ारों दुख और परेशानियां मिलेंगीं। कहीं प्यार तो कहीं तिरस्कार मेलगा। लेकिन आपको हारना नहीं है, आपको शांत रह कर, गंभीर रह कर हर मुश्किल का सामना करना है। फिर देखना आप एक दिन बुद्ध बन जाओगे और सारी दुनिया कहेगी-- बुद्धम शरणम गच्छामि!!


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