जो ख़्वाहिशें बह रही हैं। - Silsila Zindagi Ka
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    जो ख़्वाहिशें बह रही हैं।

    जो खामोशियाँ खामोश हैं
    उन्हें खामोश रहने दो.
    जो ख़्वाहिशें बह रही हैं
    उन्हें अनवरत बहने दो.

    ज़िन्दगी कुछ कहानी
    कह रही है
    सुनो गौर से और
    उसे कहने दो.
    तुम मुझे कुछ अपनी
    आदतें दो
    तुम कुछ मेरी आदतें
    अपने पास रहने दो
    जो ख़्वाहिशें बह रही हैं
    उन्हें अनवरत बहने दो.

    चलो गुनगुनाते हैं
    चलो मुस्कुराते हैं
    कुछ तुम मेरी
    कहानी कहो
    कुछ तुम अपनी कहानी
    मुझे कहने दो
    जो ख़्वाहिशें बह रही हैं
    उन्हें अनवरत बहने दो.
                   "अनिल"





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