एक ख़्वाब ही है जो साथ नहीं छोड़ता । - Silsila Zindagi Ka
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    एक ख़्वाब ही है जो साथ नहीं छोड़ता ।


    सब साथ छोड़ देते हैं जहाँ में
    एक ख़्वाब ही है
    जो कभी साथ नहीं छोड़ता।

    हर पल, हर कदम
    साथ चलता है परछाई की तरह ।
    तन्हाई में, शहनाई में
    मिलन में, जुदाई में
    एक ख़्वाब ही है
    जो कभी साथ नहीं छोड़ता ।

    सुबह, शाम और रात में
    मुलाक़ात में और बात में
    चाहत और इबादत में
    नफ़रत और मोहब्बत में
    एक ख़्वाब ही है
    जो कभी साथ नहीं छोड़ता ।

    खुशी में और ग़म में
    ज़ख्म में और मरहम में
    ज़मीं पर और आसमां में
    ज़र्रा, ज़र्रा इस जहां में
    एक ख़्वाब ही है
    जो कभी साथ नहीं छोड़ता ।

    इश्क़ में और जंग में
    ज़िन्दगी के हर रंग में
    अंधेरे में और उजाले में
    रोटी के हर निवाले में
    एक ख़्वाब ही है
    जो कभी साथ नहीं छोड़ता ।

    हुस्न के बाज़ार में
    दिल के व्यापार में
    सुर में और ताल में
    ज़िन्दगी के हर हाल में
    एक ख़्वाब ही है
    जो कभी साथ नहीं छोड़ता ।
              "अनिल"

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