नौरंगा और भुआल छपरा का विकास अब नहीं होगा तो कभी नहीं होगा - Silsila Zindagi Ka
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    नौरंगा और भुआल छपरा का विकास अब नहीं होगा तो कभी नहीं होगा





    मुझे हर हाल में अपने ग्राम सभा को विकास की राह पर ले जाना है। दुनिया आज 21 वीं सदी के दौर में अंतरिक्ष पर यात्रा कर रही है। लेकिन मेरे गांव नौरंगा और भुआलछपरा आज भी उसी पिछड़े और बदहाल स्थिति में जीने को मज़बूर है। आख़िर क्यों? क्यों हम पिछड़े हैं? क्यों हम आज भी उन नेताओं  के उन झूठे वादों के सहारे जी रहे हैं? कभी भरत सिंह, तो कभी सुरेंद्र सिंह और ज़्यादा से ज़्यादा क्या हुआ? लंबी सी ईंट की सतह पर हेलीकॉप्टर से उतर कर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री का आ जाना। इससे ज़्यादा क्या हुआ? 
    थरथराते  और कांपते हुए उस पीपा के पुल से कभी विनय सहस्त्र बुद्धे और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री दिनेश कुमार जी से कहो, एक बार उस पीपा पुल से गुज़र जाएं, उनकी रूह न कांप जाए तो कहना। 
    लेकिन कोई फ़ायदा नहीं! क्योंकि भुआल छपरा और नौरंगा ग्राम सभा की जनता को सिर्फ नारे लगाने और झूठे भाषण सुनने के सिवा आता ही क्या है?

    18 अप्रैल, 2018...जब उत्तर प्रदेश के उप मुख्मयंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का नौरंगा ग्राम सभा में आगमन हुआ था। श्री फेकू बाबा के पावन स्थल पर। मीडिया कर्मी और तमाम जनता के बीच एक लड़का हाथ में बैनर लिए खड़ा था, जिस पर स्पष्ट शब्दों में लिखा था " मुझे कुछ कहना है"।
    लेकिन किसी ने उसे कहने नहीं दिया। उसे रोक दिया गया। कोई एक ग्रामवासी भी सामने नहीं आया और बोला कि कहो। 



    गाने का प्रोग्राम रखा गया था। ढ़ोलक, झाल और गाने का आनंद खूब लिया लोगों ने। गाना भी खूब रोचक था। पैसे भी खूब लुटाये गए। महुआ टीवी और पता नहीं कौन से टीवी के प्रोग्राम से निकले हुए प्रसिद्ध कलाकार बुलाये गए थे। ख़ूब लोगों ने मज़े लिए। आनंद उठाया।

    लेकिन असली मज़ा तो उन नेताओं की बातें सुन के आ रहा था, जो नौरंगा ग्राम सभा के विकास के लिए भीख मांग रहे थे। लेकिन आपको नहीं पता शायद सच्चाई और दिखावे का? 
    पास हो गया न पीपा पुल? बन गया न पुस्तकालय? शुरू हो गया न बिजली आने का काम? 

    ज़रा एक बार गौर से देखो नौरंगा ग्रामवासियों! तुम्हारे पास ही में बसा एक छोटा सा डेरा, जिसे रामदयाल ठाकुर का डेरा कहते हैं। जो बिहार में आता है, वहां से हाई वे जैसी सड़क निकली है। तुम बताओ वहां कौन सा नेता आया और कौन सा गाना, बजाना हुआ?  फिर भी वहां की सड़कें और बिजली विकास की कहानी को बयां करती है।
    क्या तुम लोगों को शर्म नहीं आती कि तुम पिछले न जाने कितने सालों से "ज़िंदाबाद" के नारे लगा रहे हो और नेताओं के पैरों में पड़कर गिड़गिड़ा रहे हो। क्या हो गया तुम्हारा? कभी चुनाव बहिष्कार तो कभी सौर प्लेट मिल जाये उसकी खुशी में सब कुछ भूल जाना। तुम सोचना ज़रा!लेकिन तुम्हारा भविष्य सिर्फ भविष्य ही बनकर रह जायेगा ध्यान रखना!!




    अब किसी में हिम्मत है तो जा के पूछो उस विधायक सुरेंद्र सिंह से जो बड़े से स्टेज पर खड़ा हो कर नौरंगा ग्राम सभा के विकास के लिए भीख मांग रहा था। पूछो उससे जो तुम्हारे गांव को गोद लिया था। पूछो उससे जो इस ग्राम सभा को 5 लाख रुपये विकास के लिए देने का वादा किया था? पूछो उससे जो हेलीकॉप्टर से उतरा था और बिजली लाने का वादा किया था। ये तो सिर्फ वादा है और कहने वाले ने ठीक ही कहा है"वादा तो टूट जाता है"!




    इन सबसे पहली बात। किसी भी ग्राम सभा के विकास की शुरुआत ग्राम प्रधान के लेखा जोखा से होता है। राशन सामग्री, सड़क के पैसे, स्कूल बनवाने के पैसे, शौचालय बनवाने के पैसे और अन्य ग्राम विकास कार्यों के लिए सरकार से किश्त आती है। लेकिन जब किश्त आती है तो उसका सदुपयोग कहां-कहां होता है और कहां जाते हैं वो पैसे? वो पैसे कहां जाते हैं? तुमको पता है? जबकि केंद्र सरकार से भरपूर पैसे आते हैं गांवों के विकास के लिए।
    पहले प्रधान से हिसाब लो। अगर प्रधान हिसाब नहीं देता तो मुझे बताओ, मेरा वादा है मैं तुम्हारी आवाज़ को वहां पहुंचाऊंगा जहां तुम्हारी आवाज़ सुनी जाएगी।
    अपने घर के दरवाजे से सड़क निकाल लेना बड़ी बात नहीं, बल्कि बड़ी बात तो ये है कि किसी और के घर से सड़क किसी प्रधान या किसी नेता के घर तक जाए। जिस दिन ऐसा हो जाएगा उस दिन विकास ज़रूर होगा। 


    लेकिन ज़रूरी ये है कि पहले अपने आपको समझना है। किसी के पीछे भागने से कुछ नहीं होता। उससे अपना ही मनोबल गिरता है और इंसान थक जाता है। जैसे तुम थक गए हो! और इसमें तुम्हारी ग़लती है। मानो या न मानो। बुरा मानो या भला।
     लेकिन अब वक़्त आ गया है ये ढूंढने का कि नौरंगा ग्राम सभा का विकास क्यों नहीं हो रहा है? और विकास होगा तो कैसे? क्या रास्ता है उसका?

    मैं आपसे वादा करता हूँ कि अपने अगले लेख में नौरंगा ग्राम सभा के विकास का कोई आयडिया लेकर आऊंगा और ये भी वादा है कि इस ग्राम सभा की कहानी एक दिन प्रधानमंत्री तक जाएगी।
    लेकिन ज़रूर बताईये कि आपको कैसा लगा मेरा ये सुझाव और लेख। कमेंट बॉक्स में लिखिए। आप मुझे ई मेल के ज़रिये भी संपर्क कर सकते हैं- wonderfullworld6@gmail.com


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    3 comments:

    1. जब भारत और बांग्लादेश के गांव की अदला बदली हो सकती है कल तो उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमांत गांव की अदला बदली क्यों नहीं हो सकती बिहार प्रदेश में शामिल होने के लिए हमें आवाज उठानी चाहिए बिहार राज्य में होने से वास्तव में विकास की बयार हमारे गांव में भी बहती

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    2. ऊपर जो कमेंट मैंने किया है यह मेरी व्यक्तिगत राय है अगर आप सहमत हैं तो आप उसे जोर-शोर से उठाएं और भाई छपरा नौरंगा को बिहार प्रदेश में शामिल करने के लिए एक सही दिशा निर्देश दें धन्यवाद

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    3. बिल्कुल हो सकता है। लेकिन ये आवाज़ एक साथ उठनी चाहिए और तब तक उठनी चाहिए जब तक बदलाव नहीं हो जाता।

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