• Welcome To My Blog

    अब तो मेरा हिसाब कर दे

    ख्वाहिशें रेत की तरह मुट्ठी  से फिसल  रही हैं
    रोज़ दिल से कई दर्द भरी आहें निकल रही हैं
    इसको आग़ाज़ कहूँ या अंज़ाम समझ नहीं आता
    ना निशाना बदल रहा है ना निगाहें बदल रही हैं
    कर दे बेरंगत मेरा हर वज़ूद 
    या फिर कोई नया ख़्वाब भर दे
    थक गया हूँ ज़िन्दगी
    अब तो मेरा हिसाब कर दे ।

    चलता हूँ रस्तों पे पूछता हूँ सफ़र कहां है
    रहता हूँ आशियाँ में पूछता हूँ घर कहां है
    ना वो महफिलें-शाम ना वो रौनके सुबह है
    मिलता था सुकूं जिसमें वो पहर कहां है
    जकड़ा हूँ वर्षों से ग़ुलामी की जंजीरों में
    अब तो मुझे आज़ाद कर दे
    थक गया हूँ ज़िन्दगी
    अब तो मेरा हिसाब कर दे।


    No comments:

    Post a Comment

    Featured Post

    Journey From Finite To Infinite/एक नए सफ़र की ओर

    Journey From Finite To Infinite जब भी कभी मैं अपने बड़े भाई के बारे में सोचता हूँ, मुझे गर्व होता है। जब भी कभी मैं अपने भाभी (खुशी सिंह)...