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    सावन का पावन महीना और हर-हर महादेव के नारों से गूंजायमान होता देवघर




    सावन का पावन महीना शुरू होते ही हर कांवरिया बाबा भोलेनाथ की भक्ति के रंग में रंगा जाता है और निकल पड़ता है, भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र बैजनाथ धाम की ओर जो झारखंड के देवघर में स्थित है।

    मान्यता है कि इस पावन, मनभावन धाम पर जो भी श्रद्धालु श्रद्धा पूर्वक पहुंचते हैं, उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। ऐसा भी कहा जाता है कि ये वो धाम है, जहां भगवान शिव साक्षात प्रकट हुए और यहां उनकी ज्योतिर्लिंग स्थापित की गई ।



    पावन धाम बैजनाथ की कहानी-:
    क्या आपको पता है कि इस पावन बैजनाथ धाम की कहानी क्या है? आइये जानते हैं।
    पौराणिक कथा के अनुसार एक बार लंका पति रावण भगवान भोलनाथ को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर अनवरत तपस्या कर रहा था और एक-एक कर के लगातार अपने सिर काट कर शिवलिंग पर चढ़ा रहा था। इस तरह दसानन रावण एक-एक कर के अपना नौ सिर काट चुका था और जैसे ही वो दसवां सिर काटने वाला था कि भगवान शिव प्रसन्न हो कर लंकेश को दर्शन दिए और उससे वरदान मांगने को बोले। वरदान स्वरूप दसानन ने "कामना लिंग" को लंका में ले जाने की मांग रखी। क्योंकि उसकी इच्छा थी कि भगवान शिव कैलाश को छोड़कर लंका में निवास करें। भगवान शिव ने रावण को तथास्तु कहा और इसके साथ-साथ ये भी कहा कि शिवलिंग ले जाते समय रास्ते में कहीं भी तुमने शिवलिंग रख दिया तो मैं सदा के लिए वही स्थापित हो जाऊंगा। रावण ने शर्त मान ली।
    इधर सारे देवगण चिंतित हो गए कि शिव अब कैलाश छोड़ देंगें। तब सभी देवगण भगवान नारायण के पास गए और नारायण ने एक लीला के तहत वरुण देव को आचमन के माध्यम से रावण के पेट में प्रवेश करने को कहा।
    जब रावण शिवलिंग को लेकर लंका की ओर चला तो उसे बीच राह में ही लघुशंका लगी। तभी मौके का लाभ उठाकर भगवान विष्णु एक बैजू नामक ग्वाले का रूप धारण कर रावण के सामने आ खड़े हुए और रावण उस शिवलिंग को उस बैजू ग्वाले के हाथ में सौंपकर लघुशंका के लिए चला गया और घंटों लघुशंका करता रहा। 
    इधर ग्वाला वेषधारी भगवान विष्णु ने उस शिवलिंग को धरती पर रखा और गायब हो गए। (इसलिए इस धाम को बैजनाथ धाम भी कहा जाता है।)
    रावण लघुशंका करने के बाद वहां आया और शिवलिंग को वहां से उठाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वो शिवलिंग हिला तक नहीं। अंत में उदास हो कर रावण लंका चला गया।
    इसके बाद सारे देवगण आये और इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना किये और इस ज्योतिर्लिंग से भगवान शिव ने सभी देवताओं को दर्शन दिया और कहा कि जो भी मेरा भक्त मेरे इस धाम पर आएगा उसकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। तब से इसी मान्यता के आधार पर हर साल सावन के महीने में  कावरियों का हुजूम बाबा बैजनाथ धाम की ओर निकल पड़ता है।

    हर-हर महादेव के नारे से गूंजता बाबा का ये पावन दरबार सावन के महीने में स्वर्ग भी अधिक सुंदर लगने लगता है। हर कोई इस महीने में बाबा के पावन स्थल पर पहुंचना चाहता है और जल ढ़ारना चाहता है। 
    कहते हैं कि वास्तव में बाबा भोलेनाथ के इस पावन शिवलिंग का दर्शन जो कर लेता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है और हो भी क्यों न, बाबा तो हैं ही दानी। 



    दर्शनीय स्थल-:

    भगवान भोलेनाथ के इस पावन धाम पर एक से बढ़कर एक दर्शनीय स्थल हैं। जैसे बासुकीनाथ मंदिर, बैजू मंदिर, त्रिकूट, नौलखा मंदिर, नंदन पहाड़, सत्संग आश्रम आदि।

    सोचिये मत, निकल चलिए बाबा बैजनाथ के धाम पर। आपका हर मुश्किल सफर आसान हो जाएगा। आपकी हर मनोकामना पूर्ण हो जायेगी। "हर-हर महादेव का नारा और बाबा का सहारा, बनकर कांवरिया चलिए बाबा के नगरिया।

    तो दोस्तों!! कैसा लगा आपको मेरा ये लेख। मुझे ज़रूर लिखिए।।

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