Love Shayari: हिंदी शायरी/तू मुझे मेरी ज़िंदगी का पता दे - Silsila Zindagi Ka
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    Love Shayari: हिंदी शायरी/तू मुझे मेरी ज़िंदगी का पता दे

    Love Shayari: हिंदी शायरी/तू मुझे मेरी ज़िंदगी का पता दे

    Written By: Nutan Phariya

    Love Shayari: हिंदी शायरी/तू मुझे मेरी ज़िंदगी का पता दे

    तुमसे मिलना तो एक बहाना था
    मुझको   वादा   वो  निभाना  था
    जिस चमन में हम मिले थे कभी
    उस चमन से अब लौट जाना था
    मुस्कराने की  कोशिश  करते  हैं
    पर मुस्कुराने नहीं देती है ज़िंदगी.
    कब तक रुलायेगी
    बता  भी  नहीं   देती   है  ज़िंदगी.
    दुनिया वाले कहते हैं खुश रहा करो
    पर ग़मों के घेरे से बाहर
    जाने नहीं देती है ज़िंदगी.



    सुबह होते ही तुम्हारा इंतज़ार रहता है
    कुछ तो कहोगे, दिल बेकरार रहता है
    आँखें   तकती  हैं  बार-बार  रस्ते   को
    आओगे ज़ल्दी ही उम्मीद ये हर बार रहता है.


    हम तो उस शिकायत को भी मोहब्बत समझते रहे
    उनकी   हर   नादानियों  को  शरारत  समझते  रहे
    जुबां   कहती  रही  पर  दिल ना  समझी  कर  बैठा
    वो ज़ुल्म करते रहे और  हम  इबादत  समझते  रहे




    लौट आते हैं परिंदे भी शाम होते ही आशियाने में अपने
    तुम कब आओगे बता दो मुझको.
    आँखें थक गईं हैं इंतज़ार में  तेरे, इन  पलकों  से  कहो
    तुम्हारे आने का एहसास दिला दें मुझको.
    ना मेरी कोई खोज, ना अपनी ख़बर कोई, इन हवाओं से तो कहो
    तुम्हारा पता बता दें मुझको.


    दोस्तों !!  "नूतन फारिया" की कलम से निकली दिल को छू लेने वाली ये शायरी, आपको कैसी लगी. मुझे ज़रूर लिखिए.




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