चलो ज़िन्दगी! फिर से एक नया रिश्ता जोड़ते हैं - Silsila Zindagi Ka
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    चलो ज़िन्दगी! फिर से एक नया रिश्ता जोड़ते हैं



    चलो ज़िंदगी!! फिर  से एक  नया रिश्ता  जोड़ते हैं
    दुनिया की हर बंदिश को  साथ  मिलकर तोड़ते  हैं

    चलो भूल जाते हैं उस बुरे  वक़्त को जो  बीत  गया
    ऐसा भी  तो नहीं  कि हम  हार गए, वो  जीत   गया

    धुप में  या  छाँव में या  किसी  भी  कठिन  सफ़र में
    ऐ ज़िंदगी!! तू  ही  मेरे साथ रहना  मेरे  हर  पहर में

    जहां मेरी ज़रूरत पड़े बेहिचक मेरा नाम नाम लेना
    और जहां मैं गिरूँ तुम आ के मेरा  हाथ  थाम  लेना

    तुम कुछ मेरी सुनना, तुम कुछ मुझे  अपना  सुनाना
    मैं तुम्हें मनाऊँगा और मैं रूठा तो  तुम मुझे  मनाना

    मैं तुम्हारे लिए ग़ज़ल, तुम  मेरे  लिए  कहानी  लिखना
    मैं तुम्हें ऐ ज़िंदगी लिखूंगा, तुम मुझे जिंदगानी लिखना

    मैं जो कभी हो जाऊं तन्हा, चुपके से मेरे  करीब आना
    जब टूटने लगें मेरी उम्मीदें तो बन के मेरा नसीब आना

    जहां से रास्ता मुड़ा है, वहां फिर से एक राह मोड़ते हैं
    चलो ज़िन्दगी!! फिर  से  एक  नया रिश्ता   जोड़ते हैं
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