• Welcome To My Blog

    फिर से यादों का सागर उमड़ पड़ा है




    फिर से यादों का सागर उमड़ पड़ा है
    हाँ, तेरी तुम्हारी  यादों का सागर.
    और यादों के सागर में
    ना जाने कितनी कही -अनकही
    बातों की तरंगें हैं.

    वो मिलना और बिछड़ना.
    वो रूठना और  मनाना
    वो कसमें और  वादें
    वो प्यार और तकरार
    वो खुशियाँ और दर्द
    वो मोहब्बत और इबादत
    वो नफ़रत और चाहत
    वो बेचैनियाँ वो राहत

    सब कुछ यादों के सागर में
    अभी भी ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है.
    सोचता हूँ कि अब इन यादों को
    कभी याद नहीं करूँगा.

    लेकिन क्या करूँ?
    मजबूर हूँ
    तुम्हारे  नाम की कोई हवा आती है
    और जैसे ही तरंगों को छूती है
    तुम्हारी यादों का सागर फिर से उमड़ पड़ता है.

    एक ख्वाहिश है मेरी
    आ फिर से आ
    मुझसे मिलने के लिए नहीं
    मुझे प्यार करने के लिए ही नहीं
    और ना ही मेरा हाथ थामने के लिए.
    बस इन यादों के सागर को समझाने के लिए
    कि यूं वक़्त-बेवक्त ना उमड़ा करे.
    मुझे यकीं है तुम्हारी बात वो समझ जाएगा
    और मेरे दिल को भी शायद सुकूं मिल जाएगा.

    No comments:

    Post a Comment

    Featured Post

    Journey From Finite To Infinite/एक नए सफ़र की ओर

    Journey From Finite To Infinite जब भी कभी मैं अपने बड़े भाई के बारे में सोचता हूँ, मुझे गर्व होता है। जब भी कभी मैं अपने भाभी (खुशी सिंह)...