यहाँ प्रतिदिन श्रद्धा और प्रेम का सागर उमड़ता है - Silsila Zindagi Ka
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    यहाँ प्रतिदिन श्रद्धा और प्रेम का सागर उमड़ता है


    दोस्तों! अगर हमारी ज़िन्दगी में प्रेम नहीं है तो फिर कुछ नहीं है। अगर हम किसी को प्रेम कर नहीं सकते तो हमें किसी से प्रेम की अपेक्षा भी नहीं रखनी चाहिए। लेकिन ज़रा सोचिये, वो ज़िन्दगी ही क्या कि हमने किसी से प्रेम न किया। वो ज़िन्दगी ही क्या कि हमें किसी से प्रेम न मिला। फिर तो सब बेकार है। वैसे भी आज के इस नफ़रत की दुनिया में, तेज़ी से भाग रहे वक़्त के बीच किसको प्रेम करने का मौका है। लेकिन ये भी सच है कि आज भी कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके हृदय में प्रेम कूट-कूट कर भरा है। 



    जी हाँ, ऊपर की तस्वीरें देखिए, लोगों का काफ़िला देखिए....और सबका मुस्कुराता चेहरा देखिए। यह एक गाँव का सीन है। भारी संख्या में  इकट्ठे लोग। इनके हृदय में जितनी श्रद्धा और भक्ति का  भाव दिख रहा है, उतना ही इनके हृदय में  प्रेम भी है एक-दुसरे के प्रति। प्रेम की परिभाषा कोई इनसे सीखे। 



    गाँव के हर कार्यक्रम में यहाँ के युवा, बुड्ढ़े, बच्चे एक-दुसरे से अपना प्रेम बांटते हुए हर काम में भागीदार होते हैं। इस गाँव का कोई भी सामाजिक कार्य हो, धार्मिक कार्य हो या फिर कुछ अन्य....सभी एक साथ आगे बढ़ते हैं।जोशीले और जुनूनी इस गाँव के लोग अपने दम पर हर काम को अंज़ाम देते हैं। तस्वीरों में आप देख सकते हैं, लोगों का प्रेम, लोगों की खुशी। अवसर था गाँव में भगवान शिव की स्थापना का। श्रद्धा और प्रेम के भाव की बारिश करते ये लोग नाच रहे हैं, झूम रहे हैं और जय-जय के नारे लगा रहे हैं। यह पहली बार नहीं हो रहा। बल्कि हर अवसर पर लोग इसी तरह एक- दुसरे से अपना प्रेम बांटते हैं, अपनी खुशियाँ बांटते हैं। इस गाँव के लोगों का यह अंदाज़ देखते ही बनता है। और यह ऐसा इसलिए है कि यहाँ के हर एक नागरिक समझ चुका है कि प्रेम के बिना कुछ भी नहीं....एकता के बिना कुछ भी नहीं। अगर हमें समाज और गाँव को आगे ले जाना है तो हमें अपने  प्रेम सद्भाव और अपनी एकता की अखंडता को इसी तरह बरकरार रखना पड़ेगा। 



    दोस्तों!! हम भी यही चाहते हैं कि ये समाज, गाँव और हम सभी इसी तरह एक साथ आगे बढतें रहें। आने कर्तव्य पथ पर चलते रहें। रोज़ इसी तरह श्रद्धा और प्रेम का सागर सबके दिलों में उमड़ता रहे और दुआ है कि इसी तरह सबका "सिलसिला ज़िन्दगी का" आगे बढ़ता रहे। 

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