तेरे चले जाने से "माँ"- नुतन फारिया की कविता - Silsila Zindagi Ka
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    तेरे चले जाने से "माँ"- नुतन फारिया की कविता

    ("माँ" पर नुतन फारिया द्वारा लिखी गई एक बेहतरीन रचना। आप ज़रूर पढ़िए)


    तेरे चले जाने से "माँ"

    आज घर बड़ा सुना सा लगता है। 

    आग सुलग रही दिल में, 

    जैसे विरहरूपी पतंगा जलता है। 

    खुला माहौल भी एक कोना सा लगता है। 

    तेरे चले जाने से "माँ"

    आज घर बड़ा सुना सा लगता है। 

    रौशन थी मेरी ज़िंदगी जब तू मेरे साथ थी, 

    अब तो सब वीराना सा लगता है। 

    होती थी लबों पे ख़ुशी 

    क्योंकि मेरा ग़म डरता था तुझसे, 

    अब तो दुःख ही दुःख का ठिकाना सा लगता है। 

    होती थीं ख़्वाहिशें पूरी मेरे बोलने से पहले, 

    अब मेरे जीवन का बिखरा ज़माना सा लगता है। 

    तो थी तो बहुत से अपने भी थे, 

    तेरे जाते ही सब बेगाना सा लगता है। 

    तेरे चले जाने से "माँ" 

    आज घर सुना- सुना सा लगता है।

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    (दोस्तों!! कैसी लगी "माँ" पर लिखी हुई ये पंक्तियां? ज़रूर बताईये। आप मुझे E-mail के ज़रिए भी संपर्क कर सकते हैं। wonderfullworld6@gmail.com)

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