मैं ख़ुद से बेख़बर हूँ - Silsila Zindagi Ka
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    मैं ख़ुद से बेख़बर हूँ

    मैं  ख़ुद  से   बेख़बर   हूँ
    मुझ से मेरा हाल ना पूछो
    कैसी चल रही है ज़िन्दगी
    मुझ से ये सवाल ना पूछो।

     (Mai  Khud  se  Bekhabar hun
      Mujh se mera hal na puchho
      Kaisi  chal  rahi  hai  zindagi
      Mujh se ye sawal na puchho)

    ज़माने के कारवां में घूँट रही है ज़िन्दगी
    जाने किस मोड़ पे  छूट रही है ज़िन्दगी
    ख़्वाबों के पन्ने भी अब बंद होने लगे हैं
    अपने ही घरौंदे में  टूट  रही है ज़िन्दगी।

    (Zamane ke Karvan me Ghunt rahi hai zindagi
     Jane  kis    mod   pe   chhut  rahi  hai   zindagi
     Khwabo ke panne bhi ab band hone   lage hain
     Apne  hi  gharunde   me  tut  rahi  hai   zindagi)


    थोड़ा आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी
    अभी बहुत  दूर तलक जाना है
    अभी कई सपनों से मिलना  है
    अभी कई ख़्वाबों को पाना  है।

    (Thoda Ahista chal  Ai  Zindagi
      Abhi bahut dur talak jana hai
      Abhi kai  sapno  se milna  hai
      Abhi kai Khwabo ko Pana hai)

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