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    जवां होती रात में चौबारे पर खड़ी एक ज़िंदगी






    किसी ने पूछा ज़िंदगी कैसी है? तो किसी ने क्या जवाब दिया..."ज़िंदगी तो हल्की-फुल्की है, बोझ तो ख़्वाहिशों का है". 
    दोस्तों! सोचिये, अगर ख़्वाहिशें न होतीं तो ज़िंदगी इतनी बेताब और बेक़रार न होती. कितने सुकूं से सोती और रहती ये ज़िंदगी? पर ये भी सच है कि ख़्वाहिशें न हों तो फिर ज़िंदगी का कोई मक़सद नहीं रह जाता है. और जब मक़सद ही नहीं तो ज़िंदगी का क्या मायने? 
    रात के 2  बज रहे थे और हम सड़क पर चाय पीने निकले. एकचौबारे पर एक 20 साल का लड़का सायकल खड़ी किये हुए खड़ा था और चाय बेच रहा था. शहर की रात पूरी तरह जवां हो रही थी और वो लाइट के नीचे खड़ा कस्टमर का रास्ता देख रहा था. हम लोग पहुंचे और उससे चाय लिए. बातचीत के दौरान ही उसने बताया कि वो बिहार के सुपौल जिले से बिलांग करता है और अपनी ज़िंदगी को आगे बढ़ाने के लिए रोज़ इसी चौबारे पर सुबह 4 बजे तक चाय बेचता है. हालांकि किसी दिन कस्टमर काम आते हैं, किसी दिन ज़्यादा. लेकिन गुज़ारा हो ही जाता है. ये हमारी मज़बूरी है कि हम ऐसा करते हैं. रात को खड़े हो कर चाय बेचने में रिस्क भी है. पुलिस न आ जाए, इसका भी डर लगता है. लेकिन क्या करे सर, सिलसिला ज़िंदगी का आगे बढ़ता रहे, इसके लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा. 
    बातों-बातों में उसने अपना नाम सत्या बताया और कहा कि दो साल पहले वो मुम्बई आया था. कुछ समय तक वो कहीं और काम किया लेकिन ज़्यादा कमाई ना होने की वजह से उसे यह धंधा शुरू करना पड़ना. पूरी रात जागना तो पड़ता है, मेहनत तो करनी पड़ती है, लेकिन गुज़ारा हो ही जाता है. 
    जब मैंने उससे मुस्कुराते हुए कहा कि मैं तुम्हारी फोटो निकाल लूँ...? अपने ब्लॉग में डालूंगा. तो उसने मुस्कुराते हुए कहा- निकाल लीजिये, मैं तो फेमस होना ही चाहता हूँ. मैंने उसकी एक तस्वीर निकाली.
    इसके बाद मैं सोचने लगा, जवां होती रात में चौबारे पर खड़ी यह ज़िंदगी को आगे ले जाने का कितना जूनून है. आँखों में कितने सपने हैं. कितनी ख़्वाहिशें हैं...? और चाहत तो देखिये...फेमस होने की. 
    मेरे मन में यह ख्याल आया कि छोटे-छोटे काम कर के ही इंसान एक दिन बड़ा बनता है और क्या पता, आधी रात को चौबारे पर चाय ब्बेच रहे इस सत्या की फेमस होने की ख़्वाहिश भी किसी दिन पूरी हो जाए.
    मैंने दिल से सत्या के लिए दुआ किया कि उसकी हर वो ख़्वाहिश, हर वो ख्वाब पूरा जाए जो वो चाहता है और मैंने चलते-चलते उससे कहा- सत्या तुम इसी तरह मुस्कुराते रहो...और इसी तरह "सिलसिला ज़िंदगी का" तुम्हारा हमेशा चलता रहे.

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