ऐ मोहब्बत! - Silsila Zindagi Ka
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    ऐ मोहब्बत!

    ऐ मोहब्बत!
    तू कहाँ से आया है
    और तुझे कहाँ जाना है?
    तू रहता कहाँ है
    और तेरा कहाँ ठिकाना है?


    तू कब आता है, कब जाता है
    दीवानों को क्यों तड़पाता है?
    वो जो तेरे लिए जीते-मरते हैं
    आख़िर उन्हें क्यों रुलाता है?

    तू  इतना  बेरहम  क्यों है
    तू  इतना बेवफ़ा  क्यों है?
    दीवानों  को देता  है दर्द
    बता उनकी ख़ता क्या है?

    वो जो तुझको प्यार करते हैं
    वो जो तेरा इंतज़ार करते हैं।
    उनको   क्यों  देता  है  दग़ा
    जो  तेरा  ऐतबार  करते  हैं।

    तू बेवफ़ा है, तू  बेरहम  है
    दिल को देता बहुत ग़म है।
    लेकिन ये भी  हक़ीक़त है
    तेरे   बिना अधूरे  हम   हैं।

    ऐ मोहब्बत!
    तू कहाँ से आया है
    और तुझे कहाँ जाना है?
    तू रहता कहाँ है
    और तेरा कहाँ ठिकाना है?

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