अश्क़ आंखों में इस क़दर उतर गया - Silsila Zindagi Ka
  • Welcome To My Blog

    अश्क़ आंखों में इस क़दर उतर गया

    अश्क आंखों में इस क़दर उतर गया
    गिरा  हथेली  पर  और  बिखर गया 

    मेरी मुस्कुराहट के पीछे कई ग़म हैं
    और लोग सोचते हैं में निखर गया

    जिस दर्दे-दिल से वास्ता तोड़ा था
    वही दर्द फिर से दिल में ठहर गया



    जिसे दिलो-जान से  चाहा  था  मैंने
    ऐ मोहब्बत! बताओ वो किधर गया

    जिसको अपना समझता था दिल से
    वो  ही  मुझे   यूँ  बेगाना   कर  गया

    ऐ दिल! अब चल सो जा  सुकूं  से
    इश्क़ करने का  अब  वो पहर गया

    एक दीवाना था जो लापता है अब
    क्या मालूम वो ज़िंदा है या मर गया





    No comments:

    Post a Comment