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    कुछ कहता है ये सावन: मेरा गाँव मेरा देश

    कुछ कहता है ये सावन- मेरा गाँव मेरा देश
    शायद सावन भी मेरे गाँव को जब नज़दीक से एक बार देखता है तो कहता है- मेरा गाँव मेरा देश।
    मैं दुनिया में चाहे जहाँ रहूँ, मैं अपने गाँव से हमेशा जुड़ा रहता हूँ। शायद यही वज़ह है कि मेरा गाँव मेरे दिल के क़रीब है और मैं अपने गाँव के दिल के क़रीब।


    A MORNING OF MY VILLAGE
    वैसे आपने सुबह तो बहुत देखी होगी, लेकिन शायद मेरे गाँव की सुबह जैसी सुबह आपने नहीं देखी होगी। इतनी प्यारी सुबह बहुत कम ही देखने को मिलती है। 
    तो आज। मैं आपको अपने गाँव की सुबह से रु-बरु करा रहा हूँ।

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    कहते हैं कि भारत गांवों का देश है और भारत देश के विकास की कहानी का अंदाज़ा लगाना हो तो गांव का परिस्थिति को देख कर इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।





    आज सुबह बहुत दिनों बाद मैं अपने गांव की सड़क पर खड़ा था। दोनों तरफ जुताई किये हुए खेतों के बीच से गुज़रती हुई एक सुंदर सी सड़क और उस सड़क से ऊपर निकलते हुए सूरज को देख कर तो ऐसा लग रहा था कि यह एक नए युग का नया गाँव है, जहाँ सूरज की किरणें गर्व महसूस करते हुए अपनी रोशनी फैला रही हैं।


    निश्चित तौर पर, यह एक नए युग का नया सूरज था जो पुराने गांव को नया बनाने की कोशिश कर रहा था। बदलते गाँवों की स्थिति को देख कर मैं खुश हूँ। मैं ही क्यों? यहाँ के सभी लोग खुश हैं। 
    और हो भी क्यों नहीं? इस रास्ते से ना सिर्फ सफ़र का सड़क आसान हुआ है, बल्कि ज़िन्दगी का सफ़र भी बेहद आसान हो चुका है। यहाँ के लोगों के सपनों में जैसे पंख लग गए हैं।


    निश्चित, तौर पे दूर तक जाती यब सुंदर सड़क कई कहानियां कहती हैं, जिस पर हमें नाज़ होता है। 
    हमारी सोच बदल रही है, हम बदल रहे हैं और हमारे गांव के हालात बदल रहे हैं।
    हम ही नहीं आने वाला हर सावन, हर बार और बार-बार यही कहेगा- मेरा गांव मेरा देश और हम कहेंगे-
    कहता है ये सावन- मेरा गाँव मेरा देश

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