किन्नरों का जन्म कैसे हुआ?।।BORN OF EUNUCH।। - Silsila Zindagi Ka
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    किन्नरों का जन्म कैसे हुआ?।।BORN OF EUNUCH।।

    (किन्नरों के जन्म की कहानी, आपको चौका देगी)
    BORN OF EUNUCH


    क्या आपको पता है कि किन्नरों का जन्म कैसे हुआ? आईये बताता हूँ। इसके पीछे बेहद ही रोचक कथा है, शायद आप जानते भी हों या नहीं भी।
    जब भी आप किसी स्टेशन पर या किसी जगह पर किसी हिजड़े को देखते होंगे तो आपके मन में यह ख़्याल आता होगा कि ये किन्नर(हिजड़े) होते कौन हैं और हुए कैसे? तो चलिए मैं आपको बताता हूँ इसके पीछे की कहानी। पहले आप ये जान लीजिए कि हिजड़ों में भी पुरूष और नारी दोनों प्रकार के हिजड़े होते हैं। और ऐसे बने ये।
    पूर्व युग में एक राजा हुआ करते थे। जिनका नाम था कर्दम। उनका एक पुत्र था , जिसका नाम था "इल"।  कर्दम का पुत्र इल शिकार करने का बहुत ही शौकीन थे और वो इस कारण रोज़ वन में शिकार करने जाते थे। 
    एक रोज़ इल अपने कुछ सैनिकों के साथ वन में शिकार करने गए और इस दिन इल ने बहुत शिकार किया। फिर भी शिकार करने से इनका मन नहीं भरा। और अधिक शिकार करने की इच्छा लिए ये अपने सैनिकों के साथ उस पर्वत पर पहुंच गए जहाँ भगवान शिव अपनी पत्नी पार्वती के साथ विहार कर रहे थे।
    विहार करते-करते अचानक भगवान शिव, पार्वती को खुश करने के लिये नारी का रूप धारण कर लिए और माता पार्वती के साथ विहार करने लगे।
    शिव का नारी रूप धारण करते ही ऐसा हुआ कि वहाँ जितने भी पुलिंग जीव-जंतु, जानवर आदि थे सब स्त्री का रूप धारण कर लिए। देखते-देखते राजा "इल" और उनके सैनिक भी स्त्री बन गए। ख़ुद को स्त्री रुप में देखकर इल और सैनिक अचम्भे रह गए।
    इल परेशान हो कर भगवान शिव के चरण पकड़ लिए। भगवान शिव ने कहा कि तुम्हें जो चाहिए मुझ से माँग लो- लेकिन फिर से पुरुष रूप मांगने का वरदान मत मांगना।
    कोई उपाय न देखकर राजा "इल" ने माता पार्वती का पैर पकड़ लिया। माता पार्वती को इल पर दया आ गयी और उन्होंने कहा कि पूरा पुरुषत्व मैं तुम्हें नहीं लौटा सकती। मैं आधा पुरुषत्व ही तुम्हें दे सकती हूँ। क्योंकि आधे पुरुषत्व के स्वामी तो शिव हैं। इसलिए आधा तुम्हें स्त्री रुप धारण कर के और आधा पुरूष रुप धारण कर के रहना पड़ेगा। तो तुम बताओ कितना समय स्त्री रहना चाहते हो और कितना समय पुरूष?
    तब स्त्री बने राजा "इल" ने कहा कि मैं एक महीना स्त्री और एक महीना पुरूष का रुप धारण कर के रहना चाहता हूँ।
    पार्वती ने कहा- तथास्तु!! लेकिन यह भी कहा कि जब तुम पुरूष रुप में रहोगे तो तुम्हें तुम्हारे स्त्री जीवन का कुछ भी याद नहीं रहेगा और जब स्त्री रुप में रहोगे तो पुरूष जीवन का कुछ भी याद नहीं रहेगा।
    इस तरह राजा इल एक माह तक "इल" और एक माह तक "इला" रहने का वरदान पा लिए। लेकिन उनके सैनिक स्त्री रूप में  ही रह गए।
    कहते हैं कि एक दिन "इला" अपनी स्त्री सैनिकों के साथ कही जा रहे थी। तभी उन्हें रास्ते में चंद्रमा का पुत्र मिला और पास के ही एक पर्वत पर उन्हें रहने के लिए कहा। और उन्होंने यह भी कहा कि तुम सभी स्त्रियां आगे चलकर किंपुरुषी रूप धारण कर लोगी।
    दोस्तों!! तभी से किन्नर का जन्म हुआ?
    (कैसी लगी आपको किन्नरों की उतपत्ति की कहानी? हमें ज़रूर बताईये)!

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