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    Friendship- मेरी और सुनील दादा की दोस्ती

    Friendship- ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे

    मैं हमेशा अपने हर दोस्तों को याद करता हूँ। जो मेरे साथ हैं, वो तो हैं ही। जो नहीं हैं, उन्हें भी। बहुत Miss करता हूँ अपने सभी दोस्तों को। बहुत सारी Friendship की कहानियाँ हैं। , किस्से हैं, अफ़साने हैं। जिन्हें मैं लिखने लगूँ तो शायद कभी ख़त्म ही ना हो। उन्हीं अफसानों में से एक अफ़साना है, मेरी और सुनील दादा की दोस्ती की। 


    हम पांचवीं, छठी कक्षा से ही साथ पढ़ते थे। शुरू से ही सुनील दादा मुझे बहुत Respect देते थे और मैं भी उन्हें। साथ में क्रिकेट खेलने जाना, स्कूल जाना सब कुछ याद है। घण्टों बातें करने में समय गुज़ारना। बेवज़ह हँसना, मुस्कुराना, लगता है अभी कल की ही बात है।


    पीछे मुड़ कर मैं देखता हूँ तो मालूम चलता है कि वक़्त काफी गुज़ार गया। लेकिन हमारी Friendship ज्यों की त्यों बरकरार है। अब तो सोशल मीडिया के ज़रिए ही जुड़ा रहता हूँ। सुनील दादा ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है। हर कदम पर, हर जगह पर। जब भी मैं कुछ नया क्रिएट करता हूँ, लोगों तक पहुंचाने में उनका बड़ा योगदान रहता है।
    हर किसी से कैसे मिल-जुल कर रहना है? ज़िन्दगी में Friendship कैसे निभानी है? कैसे रिश्तों को बरक़रार रखना है- ये सुनील दादा से बेहतर कोई नहीं जान सकता है। चेहरे पर मुस्कान लिए और आँखों में प्यार लिए, ये जब भी मिलते हैं एक नया जोश पैदा होता है।
    जब भी मैं गाँव जाता हूँ, सुनील दादा से मुलाक़ात निश्चित तौर पर होती है। अप्रैल के महीने में इसी साल जब मैं गाँव गया था, तो इनसे मुलाक़ात हुई थी। हम दोनों ने काफी वक्त साथ गुज़ारा था और ढ़ेर सारी बातचीत हुई थी।

    मुझे लगता है कि Friendship का असली मायने दादा को ही पता है। क्योंकि उनसे बेहतर Friendship के रिश्ते को निभाने की कला बहुत कम लोगों में ही होती है। मैं जब पीछे मुड़ कर देखता हूँ, तो साफ-साफ नज़र आता है, दोस्त तो बहुत हुए। कोई बिछड़ा तब से याद नहीं किया। कोई बहुत सालों बाद Hi, Hello किया। कोई किसी मोड़ पर मिला तो सब ठीक है कह कर निकल लिया। किसी ने मोबाइल नंबर दिया फिर नंबर बन्द हो गया। 

    लेकिन सुनील दादा आज भी वैसे ही हैं, जैसे कि पहले थे। ना सिर्फ contact में रहे बल्कि Friendship के रिश्ते को आगे बढ़ाते हुए आज भी दिल से दिल के तार को जोड़े हुए हैं।

    हमेशा बातचीत होती है इनसे। Phone के ज़रिए, Whatsapp औए Facebook के ज़रिए। हमारी Friendship महज़ एक Friendship ही नहीं है, बल्कि वास्तविकता की एक ऐसी किताब है जिसमें आपको सिर्फ प्यार ही प्यार मिलेगा। जिसमें आपको Friendship के रिश्ते की एक नई परिभाषा मिलेगी। 
    आज सुनील दादा ने मुझसे कहा कि आपकी और मेरी दोस्ती पर कुछ लिखिए। मुझे बहुत अच्छा लगा और बहुत खुशी हुई। दुनिया के तमाम मुद्दों पर लिखता रहता हूँ, आज मेरे और दादा की Friendship के रिश्ते पर कुछ लिखना है, तो मैं ज़रा भी देर नहीं करूंगा। इसलिए यह पोस्ट मैंने लिखा है। 

    Thank You सुनील दादा! इतनी अच्छी सोच के लिए। मेरी और आपकी Freindship यूं ही चलती रहेगी। बस आप इसी तरह मुस्कुराते रहना। Frinedship का यह रिश्ता निभाते रहना। वादा है" ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे"।
    और मैं दिल से यही दुआ करूंगा कि आपको हर वो चीज़ मिले, जिसे आप हासिल करना चाहते हैं। आप सितारों की तरह जगमगाते रहिये। और "Silsila Zindagi Ka" आपका यूँ ही चलता रहे। 

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