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    हम ना रहें तो भी गुलशन में गुल खिलेंगे


    Ghazal
    हम ना रहे तो भी गुलशन में गुल खिलेंगे
    पर तुम आओ जब तब शायद हम ना मिलेंगे
    मेरे दिल की दुनिया में आग लगाकर कहाँ जाओगे
    मेरी चाहत और मोहब्बत को तुम कैसे भूल पाओगे

    तुम्हारे लबों पर हर पल तराना बन कर रहूँगा
    तुम्हारा दीवाना था और दीवाना बन कर रहूँगा
    मैं गया तो तुम्हारा श्रृंगार फीका पड़ जायेगा
    मेरे बिना तुम्हारे सपनों का संसार फीका पड़ जायेगा

    तुम्हारे अरमान, तुम्हारी ख़्वाहिशों की कहानी मुझसे है
    तुम्हारी ज़िन्दगी और उसकी हर निशानी मुझसे है
    तुम्हारे अल्फ़ाज़, तुम्हारे अंदाज़ सब मुझसे है
    तुम्हारे मौजों की रवानी और ज़िन्दगानी मुझसे है।

    Hum na rahe to Bhi gulshan me Gul to khilenge
    Par tum aao jab tab shayad hum na milenge
    Mere dil ki duniya me aag laga ke kahan jaaoge 
    Meri chaahat aur Mohabbat tum mujhe nahi bhula pooage

    Tumhari labo par main har pal tarana ban kar rahunga
    Tumhara diwana tha aur tumhara diwana ban kar rahunga
    Main gaya to tumhara har singar fika  pad jaayega 
    Mere bina Tumhare sapno ka sansar fika pad jaayega

    Tumhare Arman, Tumhari khwahisho ki kahani mujhse hai
    Tumhari Zindagi mujhse aur uski har nishani mujhse hai
    Tumhare Alfaz, Tumhare andaz sab mujhse hai
    Tumhare mauzo ki rawani aur zindgani mujhse hai.

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