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    My Village: लहलहाते खेत और मेरे दोस्त

    My Village
    गाँव आया हूँ अपने। किसी काम से अचानक आना पड़ा है। ठंडा का मौसम है। सूर्य कभी निकल रहे हैं तो कभी बादलों के बीच छुप जा रहे हैं। हर तरफ हरियाली है। गेहूं के खेतों में बालियाँ आने वाली हैं। सरसो के पेड़ पर पीले फूल लहलहा रहे हैं। चना, मसूर और सरसो की हरियाली से भी खेत हरे रंग में रंगे हुए नज़र आ रहे हैं। इन हरे-भरे खेतों के ऊपर से उड़ते हुए पंछी भी मेरे गाँव (My Village) की सुंदरता की कहानी बयाँ कर रहे हैं।

    मेरी ज़िन्दगी की सबसे अहम पाठशाला इसी सड़क से शुरू हुई थी, जिसे आप तस्वीर में देख रहे हैं। यह मेरी ज़िन्दगी की सड़क है, जो आज मुझे पटना ले कर गई और आज मुझे मुम्बई ले कर गई है। 
    हालांकि यह सड़क अभी सड़क में तब्दील हुई है, वर्ना यहां दूर तक जाता हुआ एक रास्ता दिखाई देता था। अब वही रास्ता अब सड़क में परिवर्तित हो गया है। 
    कहते हैं कि परिवर्तन ही संसार का नियम है और उसी परिवर्तन की बयार में बहता हुआ मेरा गाँव (My Village) आज जाने कितने इतिहास की गाथा को बयाँ करता है और कालान्तर तक करता ही रहेगा। क्योंकि आज सबके मुंह से जो वाह अल्फ़ाज़ सुनाई दे रहा है, कभी इसकी जगह आह सुनाई देती थी। लेकिन अब सब कुछ बदल रहा है और बदलाव की इस बयार में मेरा गाँव (My Village) निरन्तर बह रहा है।

    जिस तरह मेरा गाँव (My Village) मुझे पसंद है, यहाँ के दोस्त भी मुझे बेहद पसंद हैं। खेत, खलिहान, कच्चे और पक्के मकान, पीपल की छाँव....सब कुछ अच्छा लगता है। 
    Conclusion
    मुझे मेरा गाँव(My Village) हमेशा याद आता रहता है। यह मेरी शान है, मेरी ज़िंदगी का हक़ीक़त फ़साना है...मैं जहाँ भी रहूँ, कहीं भी रहूँ, मुझे लौट के बार-बार यहाँ आना है। फिर से यादों का एक गठरी अपने साथ ले कर यहाँ से जाऊंगा। क्योंकि यही से शुरू हुआ था मेरा "सीलसिला ज़िन्दगी का"।

    2 comments:

    1. बहुत प्रेरक है बन्धु -- मुझे भी अपने गाँव से बहुत प्यार है | गाँव के प्रति ये अनुराग और आपके दोस्तों के साथ आपका स्नेह अक्षुण रहे यही दुआ है |

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