ज़िंदगी को ज़िंदगी से मिलाने का जी करता है. - Silsila Zindagi Ka
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    ज़िंदगी को ज़िंदगी से मिलाने का जी करता है.





    एक  कहानी  जो  वर्षों  से  इस  दिल में छुपाये बैठा हूँ
    आज  उस  कहानी   को   सुनाने   का  जी   करता  है
    मुस्कुरा कर भी  जिस  मुस्कान  को  छुपाये  बैठा  हूँ
    आज उस मुस्कान  को  मुस्कुराने  का  जी  करता है

    जो उदास हैं  अलफ़ाज़  मेरे, जो  रूठा   है  अंदाज़ मेरा
    उस अंदाज़ को अपने अंदाज़ से मनाने का जी करता है
    जो ज़िंदगी, ज़िंदगी से बेदख़ल हुई थी एक ज़िंदगी के लिए
    आज उस ज़िंदगी को ज़िंदगी से मिलाने  का जी करता है

    जिसमें टूटकर बिखर गए, बिखर कर भी जिसमें निखर गए
    आज उस वक़्त को जी भर कर गले लगाने का जी करता है
    जिसमें एहसास ऐतबार का था, जो प्यारा नगमा प्यार का था
    आज उस नगमे को फिर से गुनगुनाने का जी करता है

    जिसको कभी छोड़ आये थे, खुद के हाथों से तोड़ आये थे
    फिर से उस टूटे हुए आशियाँ में  लौट आने का जी करता है.

    COPYRIGHT@ANIL PANDEY






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