- Silsila Zindagi Ka
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    ऐ ज़िन्दगी!! मुझे तुझसे मोहब्बत है!!
    हाँ बहुत मोहब्बत!! बेपनाह मोहब्बत!!

    ये सच है कि तुझसे कभी
     नफरत भी होती है
    तू जब मुझे तड़पाती है
    तो तुझसे दूर जाने की
    चाहत भी होती है।

    फिर लौट आता हूँ ये सोचकर
    कि तुझसे बिछड़कर जीना आसान नहीं।
    ऐ ज़िन्दगी!! तेरे बिना
    मेरी कोई पहचान नहीं।

    हर   पल   तू साथ रहती   है मेरी तन्हाई में
    अक़्सर तू ही नज़र आती है मेरी परछाई में
    ऐ ज़िन्दगी!! मुझे तुझसे मोहब्बत है!!

    मेरे   लबों की  खुशी   भी   तू
    मेरी   आँखों   का पानी भी तू
    मेरे एहसासों की ग़ज़ल भी तू
    मेरे  वज़ूद की   कहानी भी तू
    ऐ ज़िन्दगी!! मुझे तुझसे मोहब्बत है!!

    मेरी हर खुशी का बाहर भी तू है
    मेरी चाहत, मेरा दीदार
    मेरा   ऐतबार   भी   तू   है।
    मेरी आँखें सोते हुए भी
    देखती हैं जिसका रस्ता
    ना ख़त्म होने वाला
    वो इंतज़ार भी तू है।
    ऐ ज़िन्दगी!!मुझे तुझसे मोहब्बत है!!

    मेरी बेखुदी, मेरी तड़प
    मेरी रंजिशों का कलाम भी तू है
    मेरी हसरतों का आग़ाज़
    मेरी ख़्वाहिशों का अंज़ाम भी तू है।
    तू ही अवारगी, तू ही दीवानगी
    मेरी बंदगी का एहतराम भी तू है।
    ऐ ज़िन्दगी!! ये मेरे ज़ख्म भी तेरे
    और इन ज़ख़्मों का आराम भी तू है
     मुझे तुझसे मोहब्बत है!!

    मेरा ज़िस्म भी तेरा
    मेरी जान भी तेरी
    गर्दिशों का दौर भी तेरा
    ये मेरी उड़ान भी तेरी

    रखकर   तेरे   हाथ   पे    हाथ
    कहते हुए तुझसे दिल की बात
    फिर यही कहता हूँ
    ऐ ज़िन्दगी!! मुझे तुझसे मोहब्बत है!!






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