तेरी यादों को संभाल के रखता हूँ - Silsila Zindagi Ka
  • Welcome To My Blog

    तेरी यादों को संभाल के रखता हूँ







    तेरी   यादों   को   बहुत    संभाल   के  रखता   हूँ 
    रोज़ जां  को   हथेली  पे   निकाल  के   रखता   हूँ 

    मेरी   उजड़ती  ख्वाहिशों  का  अनोखा  किस्सा  है 
    ये ग़म भी मेरे और ये दर्द भी मेरे दिल का  हिस्सा है

    मेरी   मोहब्बत   और   तेरी   बेवफ़ाई का  फ़साना 
    ना  तुम  हुए मेरे कभी , ना कभी हुआ मेरा ज़माना 

    मुकम्मल    होकर   भी  मैं   रह   गया   हूँ    अधूरा 
    कोई मरहम भी नहीं और दिल का ज़ख्म  भी है पूरा 

    आज़माना मत मुझे, देखना  फिर से  संभल  जाऊंगा 
    मैं, मैं हो जाऊंगा और  फिर से   मैं  बदल   जाऊंगा  

    तेरी   यादों   के  ज़ख्म  जो   मुद्दतों  से तड़पा रहे हैं 
    बहुत   हुआ, अब  हम  इनसे   बहुत  दूर  जा  रहे हैं    

    एक नया आशियां  होगा,  एक  नई  जिंदगानी  होगी 
    एक नई दुनिया  होगी  और  एक  नई   कहानी होगी 

    *******************************


    No comments:

    Post a Comment