ये जो ग़म के पल हैं बीत जायेंगें - Silsila Zindagi Ka
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    ये जो ग़म के पल हैं बीत जायेंगें

    ये जो ग़म के पल हैं बीत जायेंगें
    ऐ ज़िंदगी!सब्र रख हम जीत जायेंगें

    सच होंगे देखना, हमारे हर सपने
    आएगा दौर, जब पराये भी होंगे अपने

    तन्हा थे तन्हा ही हमेशा चलेंगे
    हर मंज़र को एक दिन बदलेंगे

    इस जहां को क्या पता पहचान हमारी
    एक दिन ये ज़रूर देखेंगे उड़ान हमारी

    मेरे बुरे वक़्त पर आज हंस रहा है ज़माना
    लेकिन इन सब ने जानकर भी मुझे नहीं जाना

    मैं तो वो हूँ जो छोटी चाहत को बड़ा कर दूं
    मैं अपने दम पे एक आसमां  खड़ा  कर दूं

    मैं तो वो हूँ जो काँटों पे पांव रख के चल दूं
    मैं तो नकमायबी को भी कामयाबी में बदल दूं

    बस मौके की तालाश है इस पागल, दीवाने को
    ये तो एक दिन मात दे देगा इस ज़माने को

    चलो ज़िन्दगी! फिर से एक नई शुरुआत करते हैं
    हम एक-दूसरे से दिल की बात करते हैं।।
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