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    आपकी सकारात्मक सोच ही आपके जीवन को बदल सकती है


    दोस्तों !! कई ऐसे लोग हैं, जिनके पास काबिलियत है, जिनके पास कुछ कर गुजरने की क्षमता है..लेकिन वो मंज़िल तक पहुँचने से पहले ही हार जाते हैं. वो भी बार-बार. हर बार. सब कुछ रहते हुए भी हार जाना, ऐसा क्यों होता है?

    उसका  एक ही कारण है- नकारात्मक सोच. 

    यकीन मानिए, नकारात्म  सोच किसी भी इंसान को कभी भी सफल नहीं होने देती. क्योंकि नकारात्मकता इंसान के दिमाग का वो ज़हर है, जो सब कुछ बर्बाद कर देती है. 

    सवाल यह उठता है कि हम सकारात्मक क्यों  नहीं होने की कोशिश करते?  हम सकारात्मक क्यों नहीं सोचने की कोशिश करते? अगर हम नकारात्मक सोच को दिमाग में पैदा कर सकते हैं तो सकारात्मक सोच को भी तो उसी दिमाग में जगह देनी है. फिर हम ऐसा क्यों नहीं कर पाते?

    याद रखिये, सकारत्मक सोच हर इंसान के लिए एक ऐसा अस्त्र है, जिसकी इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है. यही नहीं अगर कोई इंसान किसी बड़ी बीमारी से भी जूझ रहा है, कोई दवा काम नहीं कर रही है..तो ऐसे समय में वो सकारात्मक हो जाए और ये सोचे कि मैं पूरी तरह स्वस्थ्य हूँ. तो एक चमत्कार होगा और वो इंसान एक दिन सचमुच पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हो जाएगा. 

    एक घटना है....एक आदमी को कैंसर हो गया. वो डॉक्टर के पास इलाज के लिए गया और डॉक्टर ने उसको चेक करने के बाद कहा कि तुम एक साल से ज़्यादा ज़िंदा नहीं रह पाओगे. वो आदमी उदास हो गया और रोने लगा. रास्ते में आंसू बहाते हुए जा रहा था, तभी सामने से आते हुए एक बाबा दिखाई दिए और उस आदमी को रोता देख बाबा ने पूछा...क्या हुआ? क्यों रो रहे हो...? वो आदमी बाबा को बताया कि उसे कैंसर है और डॉक्टर ने कहा है कि वो एक साल तक ही और जीएगा. इतना सुनते ही वो बाबा हंसने लगे. उस आदमी को बाबा पर बड़ा गुस्सा आया और सोचा कि मैं अपना दुःख बाता रहा हूँ और ये बाबा मेरे दुःख पर हंस रहा है. वो वहाँ से गुस्से में जाने लगा. तभी बाबा ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा कि डॉक्टर ने कहा कि तुम्हें कैंसर है...तुम एक साल में मर जाओगे. लेकिन तुम क्या सोचते हो...? तुम्हें कैंसर है...? उस आदमी ने कहा कि जब डॉक्टर ने कहा है तो...? 
    बाबा ने बीच में ही उसे रोकते हुए कहा...डॉक्टर का छोड़ो...तुम बाताओ...तुम्हें कैंसर है...? तुम एक साल से ज़्यादा जीना चाहते हो....? वो आदमी झट से बोला- हाँ मैं अभी 50 साल और जीना चाहता हूँ. तो बाबा मुस्कुराए और बोले तुम अगर ऐसा सोचते हो  तो मैं कहता हूँ तुम 50  साल तक जीयोगे. वो आदमी चौक गया और बोला कैसे...? बाबा बोले...मैं तुम्हें एक दवा देता हूँ, और इस दवा को तुम्हें सुबह शाम नहीं बल्कि चौबीसों घंटे इस्तेमाल करना है. जितना तुम उसका इस्तेमाल करोगे, उतना ही फ़ायदा करेगी वो दावा...कभी रिएक्शन नहीं करेगी.  वो आदमी बोला..कौन सी दवा...? 
    बाबा ने कहा कि उस दवा का नाम है...सकारात्मक सोच. बस तुम्हें और कुछ नहीं करना है...तुम्हें हमेशा सकारात्मक रहना है और सकारात्मक ही सोचना है. तुम्हें हमेशा यही सोचना है कि तुम पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हो और तुम्हें यही सोचना है कि तुम्हें 50 साल तक जीना है.  अगर ऐसा तुमने कर लिया तो ध्यान रखना....इसी जगह पर मैं तुम्हें 10 साल बाद भी मिलूंगा. 




    बाबा की कही हुई बातों से उस आदमी को थोड़ा आश्चर्य तो हुआ लेकिन उसने ये सोचा कि सकारात्मक सोचने में कोई बुराई तो नहीं है. कोई पैसे नहीं लगते हैं. क्यों ना सकारात्मक ही सोचूँ. और वो आदमी कुछ दिनों के लिए गाँव चला गया. अब धीरे-धीरे अपनी नकारात्मकता को अपने दिमाग से बाहर निकालना शुरू किया उसने. और सकारात्मक सोचने लगा. दिन भर गाँव के बच्चों, को बूढों को सभी को हंसाता रहता था. अब वो कभी सोचता ही नहीं था कि उसे कैंसर है. परिणाम ये हुआ कि देखते-देखते 4 साल गुज़र गए और वो पहले से भला-चंगा हो गया था. अचानक उसे एक दिन याद आया कि डॉक्टर ने तो कहा था कि मैं साल भर में  मर जाऊंगा. पर ये तो दो साल गुज़र गए. सोचते-सोचते उसकी आँखों में आंसू आ गए और वो समझ गया था कि बाबा ने जो दवा उसे दिया था, उससे बढ़कर इस दुनिया में किसी भी इंसान के लिए अन्य कोई दवा नहीं है. 




    तो दोस्तों!! आप अपनी सकारात्मक सोच से हर वो चीज़ कर सकते हो, जो आप चाहते हो. 
    इसलिए आज ही अपने दिमाग से नकारात्मकता को हटाओ और सकारत्मकता को जगह दे दो. फिर देखो आपके जीवन में कैसे और कितना ज़ल्दी बदलाव होता है. क्योंकि हर चीज़ हमारी सोच पर ही निर्भर होता है. हम जैसा सोचते हैं, हमारे साथ वैसा ही होता है. SO ALWAYS BE POSITIVE, NEVER THINK NEGATIVE.

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