मिल जाओ किसी मोड़ पर - Silsila Zindagi Ka
  • Welcome To My Blog

    मिल जाओ किसी मोड़ पर



    चले आओ मेरी पतझड़ सी  ज़िन्दगी  में बहार बनकर

    मिल जाओ किसी मोड़  पर बिछड़ा हुआ यार बनकर


    चाहत का पैमाना और दिल का पैग़ाम ले कर आओ

    फिर  से  अपनी  ज़बां  पर  मेरा  नाम  ले कर आओ


    फिर  से  मेरी   मोहब्बत  का   अंदाज़ बनकर आओ

    फिर  से  मेरी   ग़ज़ल  का  अल्फ़ाज़  बनकर  आओ


    फिर  से   मेरे   दिल   का  नज़राना   बनकर  आओ

    फिर से  मेरी  ज़िन्दगी  का अफ़साना बनकर आओ


    बेचैनी  के  इस  पल  में  मेरी  राहत  बनकर  आओ

    बिखरती ज़िन्दगी के  लिए  इबादत  बनकर  आओ


    चले आओ मेरी पतझड़ सी  ज़िन्दगी  में बहार बनकर

    मिल जाओ किसी मोड़  पर बिछड़ा हुआ यार बनकर


    No comments:

    Post a Comment