ये इश्क़ है ज़नाब! - Silsila Zindagi Ka
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    ये इश्क़ है ज़नाब!

    ना ये चाहत फ़ना होती है 
    ना ये प्यार ख़त्म होता है!
    जाने तुम कहाँ ग़ुम हो गए 
    न ये इंतज़ार ख़त्म होता है!!



    दिल तो दिल है
    इसके बिना तन्हा है ज़िन्दगी!
    ये नहीं है तो कुछ भी नहीं
    ना इबादत, ना चाहत, ना खुशी!!

    मंज़िलें  भी ग़ुम हो गईं कहीं
    रस्ते भी अब बेगाने  हो गए!
    लौटकर वो कभी न आये यारों
    जो आशिक़ और दीवाने हो गए!!



    तुम बिन हर दिन
    तन्हाई में गुज़र जाता है!
    तुम बिन हर रात
    बेचैनी में गुज़र जाती है!
    तुम नहीं हो तो ज़िन्दगी
    मुझे अपना कहने से 
    मुकर जाती है!! 

    तुम्हारा दिल लगाने का 
    अंदाज़ ही अलग था 
    तुम्हारा प्यार जताने का 
    अंदाज़ ही अलग था!
    तुम्हारी हर अदा निराली
    तुम्हारा सितम ढ़ाने का
    अंदाज़ ही अलग था!!


    तुम्हें चाहत थी अपना बनाने की
    पर तुम मेरा हो न सके!
    ज़माना मेरी मोहब्बत पर न हँसे
    इसलिए कभी रो न सके!!


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