सूट-बूट वाले भाई साहब बदल गए हैं - Silsila Zindagi Ka
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    सूट-बूट वाले भाई साहब बदल गए हैं

    वर्षों बाद शहर से पधारे थे गाँव में
    उनको धूप  लग  रही  थी  छाँव में
    बार-बार आसमान को देख रहे थे
    झटके से मुंह पर रुमाल फेक रहे थे
    एक ग्रामीण मिला तो "हाय" बोले
    मुस्कुराकर जाते हुए  "बाय" बोले
    ग्रामीण सोचा कि इसे क्या हो गया है
    ये टिल्लू क्यों इतना बावरा हो गया है
    ग्रामीण क्या जाने इस सच्चाई को

    कि जब से ये शहर चले गए हैं
    सूट-बूट वाले भाई साहब बदल गए हैं।

    सभी खुश होते हैं जब ये घर पहुंचते हैं
    लेकिन इन्हें देखकर जाने क्या सोचते हैं
    जो टिल्लू था अपब वो टिल्लू न रहा
    एक पल में इंग्लिश जाने क्या-क्या कहा
    अपनी माँ अब Mother बन गई थी
    बूढ़े  बाबू जी  अब Father गए थे
    छोटा वाला भाई Brother बन गया था
    और बेचारी बहन Sister बन गई थी

    सब्जी को Vegetable कहने लगे थे
    मेज को अब table कहने लगे थे
    पुरानी कुर्सी को chair कहने लगे
    यहां-वहां को Hera-there कहने लगे

    माँ सोची टिल्लू को क्या  हो  गया
    ये वही है या शहर जा के खो गया
    बहन ने कहा भैया आप दुबले हो गए हैं
    तो भैया ने चिल्लाते हुये कहा "Shut up"
    स्लिम होने के लये हम गल गए हैं
    सूट-बूट वाले भाई साहब बदल गए हैं।

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