• Welcome To My Blog

    ज़ख्मों को अश्क़ों से धो कर रोया



    ज़ख्मों   को   अश्क़ों   से  धो   कर  रोया
    कभी  जुदा  तो  कभी  तेरा हो  कर रोया
    तो  कभी  सपनों  से  दूर   रह कर तड़पा
    कभी तुझे पाने का सपना सँजो कर रोया


    कभी  तुझसे  प्यार  कर  के  रोया
    कभी  तेरा  इंतज़ार   कर  के रोया
    कभी तेरी बेवफ़ाई ने सितम किया
    कभी तुझ पे  ऐतबार  कर के रोया



    इन आँखों के आँसूओं का कोई पैमाना होता
    अगर ज़ख्म  देने  वाला  कोई  बेगाना  होता
    वो  मेरी  वफ़ा को  ज़रा  सा  भी समझ लेते
    तो आज यूँ  न  तड़प  रहा  ये दीवाना  होता


    वक़्त की  तरह  जब  वो  भी  बदल गए
    हम  भी   सोचे  और  थोड़ा  सम्भल गए
    हम  खड़े   हो  कर  मोड़  पर देखते  रहे
    वो किसी ग़ैर के साथ वहां से निकल गए


    Featured Post

    TV Show- मनाइए हमारे साथ रामनवमी का महापर्व 14 अप्रैल को

    TV Show- मनाइए हमारे साथ रामनवमी का महापर्व 14 अप्रैल को TV Show: जनम लीहले राम लला Director: Dhiraj Thakur   Writer: Anil Pandey,  ...