ऐ मोहब्बत! यूँ न जाओ मुझे तड़पा के - Silsila Zindagi Ka
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    ऐ मोहब्बत! यूँ न जाओ मुझे तड़पा के

    कभी   पास   आ   जाओ   मुस्कुरा  के
    मुझे प्यार है तुम से कह दो गले लगा के

    बन  जाओ  ज़िन्दगी और मेरी हर खुशी
    ऐ मोहब्बत! यूँ न  जाओ मुझे तड़पा के

    तुम  मेरी चाहत  हो  तुम  मेरी इबादत हो
    मेरी रूह में उतर जाओ साँसों में समा के

    कह दो कुछ किस्से, कह दो कोई कहानी
    चाहे मुझे  तरसा  के  चाहे  मुझे  रुला के

    तुम  कह  दो तो  कर  जाऊँगा  कुछ  भी
    और हर सितम सह  लूँगा मैं इस जहाँ के

    यूँ बीच  सफ़र  में  साथ ना छोड़ दो ऐसे
    यूँ न छोड़ के जाओ  मुझे अपना बना के