कौन इस दिल मे फिर से मोहब्बत भर गया? - Silsila Zindagi Ka
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    कौन इस दिल मे फिर से मोहब्बत भर गया?

    कौन इस दिल में फिर से मोहब्बत भर गया
    कौन मेरी रूह को फिर से  बेचैन कर  गया।
    कौन है जो दस्तक  दिया  है मेरी ज़िंदगी में
    कौन है जो दर्द बनने आया है मेरी खुशी में।।



    इन बेचैन निग़ाहों को इंतज़ार  किसका है
    मेरे मासूम दिल  को  ऐतबार  किसका  है।
    हर बात अल्फ़ाज़ों से ही बयाँ  नहीं होती
    महसूस करो मेरे दिल में प्यार किसका है।।


    पागल  है  दिल  जो हर दर्द को सहता है
    रोता है पर किसी से कुछ  नहीं कहता है।
    इसकी ख़ामोशी  कोई  समझ नहीं पाता
    हर दिन, पर हर  पल यह  बेचैन रहता है।।




    लफ्ज़  ख़ामोश   हैं  और  निगाहें  नम  हैं
    तेरे चले जाने से ज़िन्दगी में हज़ारों ग़म हैं।
    ना जीने का ठिकाना ना मरने की वज़ह है
    हम  तो हैं, पर  हम  नहीं  रह  गए  हम हैं।।