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    कितना बदल गया यंगिस्तान


    21 वीं सदी का दौर, जहाँ दुनिया तेज़ी से बदल रही है। इससे भारत भी अछूता नहीं है। हाँ, एक बात और- देश बदले या न बदले, यहाँ का यंगिस्तान ज़रूर बदल रहा है। तेज़ी से बदल रहा  है, रोज़ बदल रहा है।



    मैं मुम्बई शहर में पिछले कई वर्षों से देख रहा हूँ। रोज़ शाम को देखता हूँ, बीयर बार के बाहर खड़े यंगिस्तान को हर फिक्र को धुएं में उड़ाते हुए और बीयर बार के अंदर बैठकर अपने ग़मों को भुलाते हुए। ना सिर्फ लड़कों को बल्कि लड़कियों को भी।

    ये है यंगिस्तान मेरी जान
    लड़कियाँ अब किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं रही। और यह सच है। जब भी किसी लड़की को सड़क किनारे बेपरवाह, बेझिझक सिगरेट पीते हुए देखता हूँ तो मेरे मुँह से खुद-ब-खुद निकल जाता है "ये है यंगिस्तान मेरी जान"!

    और एक नया यंगिस्तान
    आपको पता ही होगा कि मुम्बई सारी रात जगती है। रात को देर से घर लौट रहा था। करीब 1 बज रहा होगा। लोखंडवाला सर्कल पर पहुंचा और कॉफ़ी पीने लगा। तभी एक गाड़ी आ कर रुकती है और उस गाड़ी से एक 20 साल की लड़की उतरती है। और बिना कुछ देखे-सोचे सड़क के किनारे डांस करना शुरू कर देती है। कपड़े इधर-उधर सरक रहे थे, पर उसे इसकी कोई परवाह नहीं थी। तभी गाड़ी से उसका अपना यंगिस्तान बाहर आता है और सिगरेट पीते हुए उसे देखकर मुस्कुराने लगता है। मेरे मन में ख़्याल आया "एक और नया यंगिस्तान"!.

    प्यार का खुलेआम इज़हार करता यंगिस्तान
    मैंने रोज़ में मुम्बई शहर में देखता हूँ यंगिस्तान चल रहा है और चलते-चलते ही इनके होठ आपके सामने ही चिपक जाएंगे। वही आप समंदर किनारे चले जाईये और देखिए कुछ ज़्यादा ही आगे निकल गया है यंगिस्तान। एक-दूसरे से चिपके प्रेमी और प्रेमिका अपने में इस तरह खोये हुए हैं कि उन्हें पता ही नहीं कि उनके सिवा भी यहाँ और कोई है। हालांकि ये प्यार करने वाले हैं इसलिए "इसलिए प्यार का खुलेआम इज़हार करता यंगिस्तान"!

    डांसिंग कार वाला यंगिस्तान
    यह यंगिस्तान वक़्त से भी आगे चलता है। और ऐसे यंगिस्तान का सफ़र शुरू होता है रात में। सड़क के किनारे गाड़ियाँ और गाड़ियों में बैठा दिखे यंगिस्तान तो आप समझ लेना यह है "डांसिंग कार वाला यंगिस्तान".

    सोशल मीडिया के दौर का यंगिस्तान
    यह सच है कि सोशल मीडिया ने आज सब कुछ बदल कर रख दिया है। रिश्तों की परिभाषा को भी इसने नया मोड़ दे दिया है। और सोशल मीडिया के इस दौर के यंगिस्तान का क्या कहना? फेसबुक पर चैट, व्हाट्सएप्प पर मैसेज, ट्विटर पर ट्वीट ने जैसे सब कुछ नया कर दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से ही ना जाने कितने बेगाने आने बन गए। दोस्ती और फिर अनजान प्यार। फिर मिलन। तभी तो इसे कहते हैं- "सोशल मीडिया के दौर का यंगिस्तान।"

    उड़ान भरता यंगिस्तान
    लेकिन इसी सफ़र में मैंने कुछ यंगिस्तान ऐसा भी देखा, जिनकी चाहत है आसमाँ को छू लेने की । जिनकी चाहत है चाँद-तारों को तोड़ लाने की। दुनिया से अलग, भीड़ से अलग अपना ख़ुद का रास्ता तय करने वाले इस यंगिस्तान को देखकर खुशी होती है और तभी तो इसे कहते हैं- उड़ान भरता यंगिस्तान!

    दोस्तों! अभी और भी कई तरह के यंगिस्तान हैं, जिन्हें बयाँ करना एक पन्ने में मुश्किल है। 
    आपकी नज़र में बदल रहा यंगिस्तान और उसका तेवर कितना कितना सही है? आप हमें ज़रूर बताईये। फिर काल मिलता हूँ एक नए मुद्दे के साथ।


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