I MISS YOU || POEM - Silsila Zindagi Ka
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    I MISS YOU || POEM

    SILSILA ZINDAGI KA:

    आज मेरी ये कविता उन सभी के लिए है, जो मेरे दिल में तो रहते हैं, लेकिन दूर रहते हैं। जिन्हें मैं बेपनाह मोहब्बत करता हूँ। जिन्हें रोज़ याद करता हूँ, लेकिन उनसे मिल नहीं सकता। उन सब से यही कहूँगा: I MISS YOU:AND THEASE LINES ARE FOR ALL OF YOU::

    जाने कितने लम्हे गुज़र गए
    वक़्त की आंधियों में 
    हम बिखर गए।
    हम चले आये इस सफ़र
    और तुम उस सफ़र गए।

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    मिलने   का  हम  वादा  कर  के
    छोड़   के  हाथ  हम   चले  गए
    जाने की चाहत ना थी फिर भी
    छोड़  के   साथ  हम  चले  गए

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    वक़्त है ये कितना बेरहम 
    कमबख़्त ये कितना जफ़ा किया
    ला के कहाँ और किस मोड़ पे
    पल भर में हमें ज़ुदा किया

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    मैं भी अच्छा, तुम भी अच्छे
    रोज़ यही हम कहते हैं
    तुम भी रहते हो ख़ुद से रूठे
    और हम भी  ख़ुद से ख़फ़ा रहते हैं 


    मिल के कभी ज़ुदा ना होवें
    चलो कोई बहाना ढूंढते हैं
    हम साथ मिल कर जीयें जहाँ
    ऐसा कोई आशियाना ढूँढ़ते हैं

    तुम से मिलने के लिए कभी तेज़ चले
    तो कभी, कहीं ठहर गए
    जाने कितने लम्हे गुज़र गए
    वक़्त की आंधियों में 
    हम बिखर गए।
    हम चले आये इस सफ़र
    और तुम उस सफ़र गए।

    दोस्तों! सचमुच, जब किसी की याद आती है तो इंसान उसे बहुत MISS करता हूँ और ज़ुबाँ से ख़ुद-ब-खुद निकल जाता है- I MISSMYOU.
    मैं भी उन सभी को मिस करता हूँ, जो मुझ से दूर हैं और जो मेरी यादों में बसे हैं।
    पर वादा है कि हम बहुत जल्द ही मिलेंगे और साथ मिल कर " सिलसिला ज़िन्दगी का" आगे ले जाएंगे।
    अगर आप भी किसी को मिस करते हैं तो हमें लिख भेजिए उनके लिए कुछ पंक्तियाँ जिन्हें आप चाहते हैं।



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