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    Village- The Soul Of India/मेरा गाँव, मेरे दोस्त

    Village- The Soul Of India

    इसमें दो मत नहीं कि भारत गांवों का देश है। तभी तो कहते हैं, Village- The Soul Of India. आज मेरा पोस्ट आधारित है Village - The Soul Of India. 
    अपने गाँव आया हूँ। इसलिए आज का पोस्ट लिख रहा हूँ Village- The Soul Of India.ये


    Village- The Soul Of India, Silsila Zindagi Ka
    बड़े भाई गुड्डू ठाकुर के साथ
    बदल जाये लोग सारे, बदल जाये जहाँ सारा
    फिर भी खेतों में सरसो लहराते रहेंगे।
    गंगा की धारा हमेशा बहती रहेगी इसी तरह
    और इसी तरह लोग मुस्कुराते रहेंगे।
    रेत के टीलों पर फिर से खड़ा करेंगे महल
    फिर से उसे बिगाड़ते और बनाते रहेंगे।
    तुम्हारे शहर में मय्यत को कंधा भले ना मिले
    हम गांव में एक-दूजे का छप्पर उठाते रहेंगे।




    मैं चाहे जहाँ भी रहूँ, दुनिया के किसी कोने में रहूँ, मेरी यादों के मानस पटल पर हमेशा तैरता है मेरा गांव। याद आते हैं मुझे मेरे गाँव के दोस्त। ज़िन्दगी के बीताये हुए वो पल भी बहुत याद आते हैं, जिन्हें हम पीछे छोड़ कर बहुत दूर निकल गए हैं और हमारी और उस बीते दौर की अब मुलाक़ात भी नहीं होगी। क्योंकि "ज़िन्दगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मक़ाम वो फिर नहीं आते"।
    Village-The Soul Of India,.Silsila Zindagi Ka
    My Village
    लेकिन ये जो यादों का कारवाँ हैं ना दोस्त! यह कभी पीछा नहीं छोड़ता। गांव आता हूँ तो ना जाने कितनी यादों का सागर उमड़ पड़ता है। कभी-कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है-  हम उसी गांव में हैं, उसी जगह पर है लेकिन उस दौर में नहीं हैं, जिस दौर में उन्मुक्त आसमान और दूर तक फैली ज़मीन पर हमारा ही नाम लिखा होता था। आख़िर गाँव तो गाँव होता है। तभी तो इसे कहते हैं Village- The Soul Of India
    गाँव आते ही मेरे चेहरे पर कितनी खुशियाँ दस्तक देती हैं, इन्हें अपने शब्दों में बयाँ नहीं कर सकता। ठंड का मौसम है। रात को ठंडी हवा शरीर के रोगटों को खड़ी कर दे रही है। लेकिन सुबह सूरज का उदय और दिन में लहलहाते खेतों में झूमते सरसो को देख कर मन झूम उठता है। 
    गाँव की हरियाली की बात ही कुछ और है। गाँव की होली और दिवाली की बात ही कुछ और है। कुछ और है हमारे गाँव की मिट्टी में जो नहीं कहीं और है।

    Village- The Soul Of India

    यहाँ प्यार भी है, तकरार भी है। मोहब्बत भी है, इबादत भी है। चाहत भी है, नफ़रत भी है। यहाँ के रास्ते, चौबारे और गालियां कुछ कहती हैं। यहाँ के लोगों की ज़िंदादिली के कहानी कई तरह की सीख देती हैं।


    हर मुश्किल का डंटकर सामना करना यहाँ के लोगों की आदत है। हर हाल में मुस्कुराना यहाँ के लोगों की फ़ितरत है। 
    उगते सूरज के साथ ही तेज़ रफ़्तार से पटरी पर दौड़ती ज़िन्दगानियाँ, ना जाने कहती हैं कितनी कहानियां। दोस्तों का मुस्कुराते हुए हाथ मिलाना, बात करना, पास आना। सुनाना कुछ अपनी, सुनना कुछ हमारी। बहुत कुछ नया मिलता है, बहुत कुछ पुराना उकेरा जाता है।
    खुशी बहुत ज़्यादा होती है तब जब देखता हूँ कि वक़्त के साथ गांव भी बदल रहा है। लोग बदल रहे हैं। लेकिन यह भी तमन्ना उठती है कि गाँव, गाँव ही रहे----इसे जकोई शहर ना कह दे।
    फिर शायद सब कुछ बदल जायेगा शहर की तरह। और फिर मेरे अल्फ़ाज़ भी फीके पड़ने लगेंगे।
    किसी ने मेरे ब्लॉग "Silsila Zindagi Ka" देखा और पूछा- आप अपने गाँव पर बहुत ज़्यादा लिखते हैं, ऐसा क्यों? 
    तो मैंने कहा- मैं अपने गाँव पर सिर्फ लिखता ही नहीं, बल्कि शब्दों को पिरोता हूँ इस क़दर कि मेरे ब्लॉग के पोस्ट में मेरे गाँव की तस्वीर उभर आती है खुद-ब-खुद।

    Village- The Soul Of India
    साथ में कुछ बेदर्द ज़माने का दर्द लाता हूँ
    और आता हूँ लेकर कुछ बेतुके फ़साने।
    ज़माना जो ग़म देता है मिटता नहीं और कहीं
    ऐ गाँव! वो ग़म आता हूँ यहीं मिटाने।
    जी हल्का हो गया तुम से मिल कर
    और पल भर में लगा हूँ मुस्कुराने।।

    दोस्तों! नहीं मालूम आप लोगों को कैसा लगा मेरा पोस्ट Village- The Soul Of India
    पर इतना मालूम ज़रूर है कि मुझे लिखते हुए बहुत अच्छा लगा। आप भी ज़रूर बताइये। गाँव के बारे में। कुछ कहिए। कुछ सुनाईये।
    इसी तरह मुस्कुराते रहिये। गुनगुनाते रहिये। और इसी तरह "Silsila Zindagi Ka" आगे बढ़ता रहे।
    गाँव की खूबसूरत नज़ारों और अनमोल यादों के साथ आपको यही छोड़े जाता हूँ। मिलता हूँ फिर ज़ल्द ही एक नए पोस्ट के साथ। Bye-Bye!!!
    (It is a Post about Village- The Soul Of India. i think, you would like This)


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