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    Horse Racing/गाँव की शादी समारोह से लुप्त होता घुड़दौड़

    Horse Racing/गाँव की शादी से लुप्त होता घुड़दौड़

    Horse Racing, Silsila Zindagi Ka
    Horse Racing

    बहुत सालों बाद गाँव के एक शादी समारोह में घुड़दौड़/Horse Racing देखने को मिला।

     दिल खुश हो गया। याद आ गया मुझे बचपन का वह दृश्य, जब गांव हर बारात में घुड़दौड़ देखने को मिलती थी। हम सभी इस घुड़दौड़ को बहुत शौक़ से देखने जाया करते थे। पहले से ही हल्ला होता था इस घुड़दौड़ का। सज-धज कर सारे लोग शादी समारोह में शामिल होने जाते थे।

    दूर-दूर तक दोनों तरफ से फैले हुए लोग। बीच में तेज़ रफ़्तार से दौड़ लगाते हुए घोड़े। उनकी घुड़सवारी पर पैसे लुटाते हुए लोग। कितना सुहाना मंज़र होता था न?
    तब ऐसा लगता था जैसे Horse Racing/घुड़दौड़ एक परम्परा थी, जिसके बिना हर बारात फीकी और उदास लगती थी। यूँ कहिए कि घुड़दौड़ हर बारात की शान होती थी। जिसके वज़ूद की बात ही कुछ और होती थी। लेकिन, अब? 
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    Horse Racing/अब गाँव की शादी समारोह से लुप्त होता घुड़दौड़

    कहते हैं कि वक़्त की बहाव में ना सिर्फ इंसान और इंसान की सोच बहती जा रही है, बल्कि कई परंपराएं और संस्कृतियां भी विलीन होती जा रही हैं।
    शायद इसी वक़्त की बहाव में Horse Racing/ घुड़दौड़ का दौर भी हमसे दूर होता गया। इतना दूर हो गया कि अब इसको देखने के लिए भी इंतज़ार करना पड़ता है। अब यदा-कदा ही यह Horse Racing/घुड़दौड़ देखने को मिलती है। और जब हम देखते हैं तो हमारे चेहरे पर खुशी दौड़ जाती है।
    जैसे मेरे साथ हुआ। जब मैंने अपने गाँव में Horse Racing/ घुड़दौड़ देखा तो मैं मुस्कुरा उठा। क्योंकि ऐसे नज़ारे मैं काफी सालों बाद देख रहा था। 
    दूर-दूर तक दोनों तरफ से फैले हुए लोग। 100 की संख्या में अपनी रफ्तार से दौड़ रहे घोड़े। फायरिंग की आवाज़। बज रहे बैंड।
    कहाँ देखने को मिलती हैं ऐसी शादियाँ शहरों में। ऐसा समारोह, ऐसा नज़ारा गाँव के सिवा और हमें कहाँ देखने को मिल सकता है? 
    निश्चित तौर पर यह नज़ारा दिल को बाग-बाग कर देने वाला है। 
    Conclusion
    मैं चाहता हूँ कि हर शादी समारोह में Horse Racing/घुड़दौड़ का यह जलवा बरकरार रहे। इसी तरह ज़िन्दगी की और घोड़ों की रफ्तार बनी रहे। सुसज्जित रहे हर शादी समारोह। मुस्कुरातें रहें सभी और सबका "Silsila Zindagi Ka" आगे बढ़ता रहे।
    लेता हूँ विदा अभी। क्योंकि फिर ज़ल्दी ही आपसे मिलना है। 


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