हज़ारों रंग हैं प्यार के - Silsila Zindagi Ka
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    हज़ारों रंग हैं प्यार के

    प्यार क्या है? क्यों होता है यह? कब और कैसे होता है यह? क्या कोई बता पायेगा. शायद इसका ज़वाब किसी के पास नहीं. क्योंकि प्यार तो ठहरा प्यार. जिसका ना तो कोई दायरा है, ना ही कोई ठिकाना.कहाँ से शुरू होता है और कहाँ ख़त्म, किसको पता है?

    वैसे एक महत्वपूर्ण बात, प्यार की परिभाषा जानने की कोशिश न ही किया जाए तो ठीक है. प्यार के ठौर-ठिकाने के बारे में ना ही पता लगाया जाय तो ठीक रहेगा. क्योंकि प्यार के तो कई रूप है, कई ठिकाने हैं और कई रंग भी हैं इसके. 
    "प्यार का थिरकता हुआ रूप यमुना की लहरों पर खुद को रचता है, कदंब की डार पर फूलता है, रात में चांदनी बन खिल उठता है, दूर किसी देश की राहों में एक गीत गूंजता हुआ चला जाता है, एक बांसुरी हिचकियाँ  लेती है! कौन किसे पुकारता है, इस पथ पर! रूह को किस की तलाश है, यह क़िसका स्पर्श कमल-पत्रों पर रंग बन खिल बैठा है."
    ये भी एक प्यार का रूप है, जिसे आप महसूस कर रहे होंगें. समझने की कोशिश कर रहे होंगें. लेकिन प्यार को समझने की कोशिश मत करो, क्योंकि इसको समझने में कई जन्म लग जायेंगें. फिर भी कोई नहीं समझ पायेगा. 

    बस ये देखना है कि प्यार करने के बाद क्या होता है? कैसा महसूस होता है? क्या मिलता है और क्या इसमें खोता है इंसान?  वैसे तो प्यार को कई लोगों ने अपने नज़रिए से देखने की कोशिश की और जिसने भी प्यार का दीदार किया, प्यार उसे उसके रंग में ही नज़र आया. जैसा कि वो देखना चाह रहा था. आईये देखते हैं कि लिखने और कहने वालों ने प्यार के बारे में क्या-क्या लिखा है? 

    प्रसिद्ध शायर और गीतकार "मजरुह सुल्तानपुरी" ने प्यार के बारे में कुछ यूं लिखा.

    "मुझे सहल हो गईं मंज़िलें, वो हवा के रुख भी बदल गए 
      तेरा हाथ हाथ में आ गया कि  चिराग़  राह  में  जल  गए"

    "प्रेम संवेदना से ज़्यादा कुछ नहीं है, लेकिन प्रतिबद्धता से अधिक है- सिनक्लेर बी फर्ग्युसन" 

    और जब किसी ने प्रेम को बहुत नज़दीक से देखा तो कुछ यूं कहा-  "रूप चिरकाल तक नहीं रहता, यौवन भी जाने के लिए आता है, बस प्रेम स्थायी है."

    "प्रेम एक पिंजरा है, जहां सिर्फ प्रकाश ही प्रकाश दिखाई देता है, परछाई नहीं - पाउलो कोएलो "

    विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक और आध्यात्मिक विषयों के कुशल लेखक जे. कृष्णमूर्ति ने प्रेम कुछ इस तरह परिभाषित किया है- जिस पल में दिल आनंद, उत्साह और गंभीरता जैसी असाधारण बातों को महसूस करता है, उसे प्रेम कहते हैं और इसमें असीम आनंद की तलाश करते हैं, जो दुनिया बदल देता है. 

    "तेरी जुल्फें-सियह की याद में आंसू झमकते हैं
       अंधेरी रात है, बरसात है, जुगनू चमकते हैं "- मीर 

    सरदार जाफ़री कुछ यूं कहते हैं प्यार के बारे में - 
    "इश्क़ का  नग्मा  जुनूं  के साज़  पर  गाते  हैं  हम
      अपने ग़म की आंच से पत्थर को पिघलाते हैं हम "

    ओशो ने तो प्रेम को बड़े ही सुन्दर शब्दों से परिभाषित किया है-
    "प्रेम को मुक्त करो व्यर्थ से और समर्पित करो सार्थक को. प्रेम को खींचो पृथ्वी से और उड़ाओ आकाश की तरफ. प्रेम को समेटो क्षुद्रों से और और विराट के चरणों में अर्पित करो- बनाओ नैवेद्य| प्रेम ही भटकाता है, प्रेम ही पहुंचाता है. 

    और भी बहुत लोगों ने प्यार को परिभाषित किया है. बहुत कुछ कहा है प्यार के बारे में. वैसे प्यार ज़िंदगी का एक अनमोल हिस्सा है. जो होता है तो हो जाता है. 
    लेकिन कभी-कभी यही प्यार इंसान को तोड़ भी जाता है. इंसान को ग़लत रास्तों पर अग्रसर कर देता है, जिसकी वज़ह से इंसान कुछ ऐसा भी कर जाता है, जो उसे नहीं करना चाहिए. ये तो सच है कि प्यार का आना जितना सुखमय होता है, उसका जाना उतना ही दुखमय भी. कुछ लोग प्यार का बिछड़ना ही अपनी ज़िंदगी की नाकामी समझ लेते हैं. वैसे ही टूटते और बिखरते लोगों के लिए एक शायर ने अपने शब्दों से कुछ इस तरह हौसला दिया है. 

    अब तो नाकामी ही तक़दीर बनी जाती है 
    ज़िंदगी दर्द की  तस्वीर बनी जाती है 
    तेरा मिलना ही था मेराजे-मोहब्बत लेकिन 
    तुझसे दूरी मेरी तक़दीर बनी जाती है .

    हाँ तो दोस्तों!! आपने भी कभी किसी से प्यार किया हो तो हमें ज़रूर लिखिए. आपके नज़र में प्यार की परिभाषा क्या है, हमें बताईये. और ये भी बताईये कि हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा...?


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