थम जा ऐ ज़िंदगी!! - Silsila Zindagi Ka
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    थम जा ऐ ज़िंदगी!!


    ना जाने किस-किस के
    अभी क़र्ज़ चुकाने  बाकी  हैं
    थोड़ा थम जा ऐ ज़िंदगी!!
    कुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं

    जो दिल में हैं, पर दूर बहुत हैं
    बात  अभी   है  उनसे   करनी
    मिलकर भी जिनसे ना मिले
    मुलाक़ात अभी है उनसे करनी

    जो खफ़ा हुए, जो रूठ गए
    उनको भी अभी मनाना है
    जो बीच सफ़र में बिछड़ गए
    उनसे भी मिलने जाना है

    कुछ किस्से अधूरे रह गए
    कुछ रह गए अधूरे फसानें
    कुछ तनहा रह गईं ग़ज़लें
    कुछ रह गयें अधूरे तराने

    कुछ लफ्ज़ ख़ामोश अभी भी हैं
    कुछ अल्फाज़ अभी भी रूठे हैं
    हर्फ़, हर्फ़ से है उन्हें जोड़ना
    जो हर्फ़ अभी भी टूटे हैं

    प्यार बहुत करते हैं तुमसे
    हम भी तो तेरे दीवाने हैं
    थोड़ा थम जा ऐ ज़िंदगी!!
    कुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं






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