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    गंगा- मैं उस गाँव का निवासी हूँ, जहाँ गंगा बहती हैं।

    गंगा- Ganga
    मैं उस गाँव का निवासी हूँ, जहाँ गंगा बहती हैं।


    मैं दुनिया के किसी कोने में रहूँ, मेरी ज़ेहन में मेरी गाँव की यादें हमेशा तैरती रहती हैं। मुझे अपने गाँव से बेहद लगाव है। और गाँव तो गाँव ही होता है। मैं हमेशा चाहता हूँ कि मेरा गाँव, एक आदर्श गाँव बने, लेकिन कभी शहर ना बने। क्योंकि फिर गाँव वाली बात नहीं रह जायेगी। मुझे नाज़ है अपने गाँव पर और मुझे नाज़ है ख़ुद पर। क्योंकि मैं उस गाँव का निवासी हूँ, जहाँ गंगा बहती है।



    बचपन से गंगा की अविरल धारा की ध्वनि सुनता रहा हूँ, जो आज भी कानों में गूंजती रहती है। हालांकि, अब मैं शहर में रहने लगा हूँ। पर आज भी गंगा की धारा की ध्वनि स्पष्ट रूप से मेरे कानों में सुनाई देती है। वो गंगा में नहाना। घण्टों छपकते रहना। और खुशी तो तब होती थी, जब गंगा हमारे घर के पास आ जाती थी। 

    वो गंगा का तट, वो बालू का रेत। वो गंगा को घर के पास आते हुए देखकर खुशी, वो वापस जाते हुए देख कर उदासी। सब कुछ याद आता है। घर के आगे लबालब गंगा का पानी निकलते हुए सूर्य की लालिमा। आज भी आँखों के सामने तैर जाता है। 
    वो डोंगी नाव, वो बड़ी नाव। वो पतवार वाली नाव, वो जनरेटर वाली नाव। आज भी जब कहीं इन्हें देखता हूँ तो मुझे अपना गाँव और गंगा याद आ जाती हैं।

    गीत गाते हुए गंगा में स्नान करने जाती औरतों का झुंड। चाचा, काका, बाबा का समूह। बच्चों का हल्ला करते हुए गंगा में कूदने का दृश्य। दूर तक तैरते हुए जाने का कम्पटीशन। पानी के अंदर डूबी मार कर दूर निकलने की ज़द्दोज़हद- सब याद है। 
    संक्रांति पर्व में दीं गंगा तट पर भीड़। मुंडन के लिए उमड़ा हुजूम। लंबी रस्सी को काटने के प्रयास करते युवा। भोज के लिए बैठी हुई लंबी कतार। छठ पूजन के लिए जाता हुआ कारवां। आज भी ज़ेहन में है।


    पहले हमारे गाँव से गंगा काफी दूर थीं। दूरी तय कर के स्नान करने जाना होता था। लेकिन पिछले कुछ सालों से गंगा गाँव के काफी समीप आ गई हैं। 
    गंगा नदी में स्नान करने के बाद हमारे गाँव के परम पूज्य श्री फेकू बाबा के मंदिर में जल ढ़ारने के लिए जाते हुए लोग। इतना सुंदर दृश्य मुझे और कहीं भी देखने को नहीं मिला।

    CONCLUSION
    गंगा की यह पावन अविरल धारा इसी तरह हमेशा बहती रहेगी। इसी तरह गंगा तट श्रद्धालुओं से जगमगाता रहेगा। इसी तरह गंगा की ध्वनि हमेशा गुनगुनाती रहेगा। लोगों के हृदय का भाव, हृदय से गंगा के हृदय तक पहुंचता रहेगा। जब तक यह दुनिया रहेगी, गंगा इसी तरह अपना अस्तित्व लिए बहती रहेंगी। इसी तरह गंगा का पानी हमेशा चमकता रहेगा। सभी लोगों का "सिलसिला ज़िन्दगी का" हमेशा आगे बढ़ता रहेगा। लिखता रहूंगा मैं इसी तरह कुछ अल्फ़ाज़ गंगा पर
    क्योंकि यह मेरे गाँव की गंगा हैं और मैं उस गाँव का निवासी हूँ, जहाँ गंगा बहती हैं।

    दोस्तों! काफी व्यस्तता के दौरान यह पोस्ट लिख रहा हूँ। क्योंकि लिखना मेरी फ़ितरत में शामिल है। हमेशा लिखता रहूंगा। कुछ आपके बारे में कुछ अपने बारे में। जुड़े रहिये मेरे ब्लॉग के साथ। मिलते हैं ज़ल्द ही एक नए विषय के साथ।।








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