जब हम चले जायेंगे लौट के सावन की तरह - Silsila Zindagi Ka
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    जब हम चले जायेंगे लौट के सावन की तरह





    स्वपन झरे फूल से, मीत चुभे शूल से
    लूट गए सिंगार सभी, बाग के बबूल से
    और हम खड़े-खड़े, बहार देखते रहे।
    कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे।

    और सचमुच कारवां गुज़र गया।
     कलम का जादूगर, अल्फ़ाज़ों का बादशाह और हर्फ़ों के मालिक 'गोपाल दास नीरज जी' ने,  20 जुलाई, 2018 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। गोपाल दास नीरज जी एक अच्छे कवि के साथ-साथ बहुत अच्छे गीतकार भी थे और कई हिंदी फिल्मों के लिए उन्होंने गीत लिखा है।
    शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उन्हें दो-दो बार भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। पद्मश्री और पद्म भूषण  देकर नवाज़ा गया। इतना ही नहीं, फ़िल्म में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए लगातार तीन बार फ़िल्म फेयर अवार्ड भी दिया गया।
    मेरा नाम जोकर, शर्मीली और प्रेम पुजारी जैसे अन्य कई फिल्मों में इनके द्वारा लिखे गए गीतों की खूब सराहना की गई।
    गीत हो या कविता या फिर शायरी, जिसकी भी रचना गोपालदास नीरज जी ने की, लोगों के दिलों को छुवा।
    निश्चित तौर पर, ऐसे महान व्यक्तित्व का दुनिया से चले जाना बेहद दुखद है।
    उनके चले जाने से सभी की आंखें नम हैं।
    गोपालदास नीरज जी! आप भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आप हमेशा हमारी यादों में रहेंगें और जब-जब हम आपकी ग़ज़ल, गीत या कविता पढ़ेंगे, आप हमें नज़र आ जाएंगे।
    मेरी तरफ से आपको शत-शत नमन।
    और चलते-चलते गोपालदास नीरज जी की कुछ पंक्तियाँ।

    जब चले जायेंगे हम लौट के सावन की तरह
    याद आएंगे प्रथम प्यार के चुम्बन की तरह
    हर किसी शख़्स की किस्मत का यही किस्सा है
    आये राजा की तरह जाए वो निर्धन की तरह
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