सचिन तेंदुलकर ने आज भी संभाल कर रखें हैं वो 13 सिक्के - Silsila Zindagi Ka
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    सचिन तेंदुलकर ने आज भी संभाल कर रखें हैं वो 13 सिक्के


    Sachin Tendulkar


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    सचिन तेंदुलकर को खेलते हुए जिसने भी देखा है वह किस्मतवाला है और सचिन के साथ जिसने भी ड्रेसिंग रूम सांझा किया, उसका क्या कहना? वो तो अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा होगा।

    याद है मुझे, जब सचिन तेंदुलकर अपने क्रिकेट करियर को अलविदा कह रहे थे तो ना जाने कितने लोग रो रहे थे। और वो इसलिये नहीं कि सचिन तेंदुलकर क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं, बल्कि इसलिए कि क्रिकेट का एक दौर सचिन के रिटायरमेंट के साथ ही ख़त्म हो रहा था।

    मुझे कई ऐसे लोग मिले, जिन्होंने क्रिकेट में रुचि लेना सिर्फ इसलिए बन्द कर दिया, क्योंकि सचिन ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है  और उनके चाहने वाले कहते हैं कि- "क्रिकेट का मायने ही था सचिन और सचिन का मायने ही था क्रिकेट"।

    कुछ तो ख़ास था उनमें
    चाहे वो मैदान के बाहर हों, या फिर मैदान पर। कुछ तो बात थी सचिन तेंदुलकर में, जो औरों में नहीं थी। आज तक शायद ही कभी किसी ने सचिन को गुस्सा करते हुए देखा होगा। अगर मैदान पर कोई गेंदबाज उनको छेड़ने या ललकारने की कोशिश करता था, तो तेंदुलकर ज़ुबान से नहीं बल्कि अपने बल्ले से उसको ज़वाब देते थे। कौन ऐसा गेंदबाज होगा, जिसे सचिन ने धोया नहीं हो। तभी तो उन्हें मास्टर ब्लास्टर कहा जाता है।

    शुरुवाती सफ़र
    सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुम्बई के दादर के एक नर्सिंग होम में हुआ था। इनके पिता ने सचिन नाम अपने पसंदीदा संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था। शुरुवाती दौर में सचिन अपने भाई के साथ मुम्बई लोकल टीम की तरफ से खेला करते थे और यही वो दौर था, जब सचिन तेंदुलकर पर उनके कोच रामाकांत अचरेकर की नज़र पड़ी। 
    कहते हैं कि जिस तरह हीरा देखते ही जौहरी को उसकी पहचान हो जाती है, ठीक उसी तरह सचिन को देखते ही रामाकांत अचरेकर ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिए और वो समझ गए कि यह लड़का लंबी रेस का घोड़ा है। इसके बाद उनके कोच रामाकांत सचिन को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिए और सचिन भी जी जान से अपने खेल में लग गए।

    सचिन ने आज भी संभाल के रखें हैं वो 13 सिक्के
    सचिन तेंदुलकर के जीवन का सबसे दिल छू लेने वाला किस्सा यह है कि जब सचिन तेंदुलकर अभ्यास कर रहे होते थें, और जब अभ्यास करते-करते उकता जाय कफ्ट थे, तो उनके कोच रमाकान्त अचरेकर विकेट पर एक रुपये का सिक्का रख देते थे, और बॉलिंग करने वाले को प्रोत्साहित करते हुए कहते थे कि जो भी सचिन को आउट कर देगा, यह सिक्का उसका हो जाएगा और सचिन आउट नहीं हुआ तो यह सिक्का सचिन का हो जाएगा। इस तरह सचिन ने कुल 13 सिक्के जीते थे और आज भी वो उन सिक्कों को अपने पास रखे हैं। सचिन कहते हैं कि यह मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा इनाम है, जिसे मैं हमेशा संभाल के रखता हूँ।

    जब सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने मैदान में पहली बार उतरे थे, तभी सबने समझ लिया था कि यह लड़का साधारण नहीं, बल्कि दूर तक जाने वाला और महान खिलाड़ी है।

    एक वाक़या है, जब सचिन पहली बार पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैदान पर उतरे, तब उनकी दाढ़ी मूंछ भी नहीं आई थी। उनके सामने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज वसीम अकरम गेंदबाज़ी करने के लिए आये औए जा कर सचिन से कहा- अपनी माँ से पूछ कर क्रिकेट खेलने आये हो?

    सचिन तेंदुलकर के बारे में जितना कहा जाय कम है। उनकी महानता के आगे शब्द कम पड़ जाएंगे। उनके बार में "विव रिचर्ड्स कहते हैं-
    मैंने डॉन ब्रैडमैन को नहीं देखा, लेकिन मेरे क्रिकेट जीवन में मैंने आज तक सचिन जैसा बल्लेबाज नहीं देखा है और अगर सचिन से कोई बढ़िया बल्लेबाज है तो वह अब तक क्रिकेट में नहीं आया है। महानतम खिलाड़ी ने कहा, सचिन ने जिस तरह से पिछले 20 वर्षों में दर्द, विफलताओं, आलोचनाओं और चोट के बावजूद भी अपने क्रिकेट जीवन को जारी रखा है वह उनके बारे में सबसे खास है जिससे मैं बेहद प्रभावित हूं। सचिन एक संपूर्ण खिलाड़ी हैं जिनका मैं सबसे अधिक सम्मान करता हूं।


    हर फॉर्मेट खेल चुके हैं सचिन
    One Day, Test, T-20, IPL सभी तरह के फॉर्मेट खेल चुके हैं सचिन और हर फॉर्मेट में उन्होंने कोई ने कोएव रिकॉर्ड ज़रूर बनाया है। सचिन जब एक बार विकेट पर टिक जाते थे तो ऐसे ऐसे शार्ट मारते थे कि सभी हैरान रह जाते थे।

    सचिन को उनकी महानता के लिए कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। सचिन की तरह तो सिर्फ सचिन हो सकते हैं।
    तभी तो अमिताभ बच्चन ने कहा है- मैं उस देश का निवासी हूँ, जिस देश में सचिन तेंदुलकर रहते हैं"।


    दोस्तों! यह थे मेरे कुछ शब्द, मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के ऊपर। कैसा लगा? बताईयेगा ज़रूर। फिर मिलता हूँ एक नए पोस्ट के साथ, ज़ल्द ही। आप जुड़े रहिये हमारे "सिलसिला ज़िन्दगी का" के साथ।

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